हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने सातवां F404‑IN20 इंजन प्राप्त किया, जिससे तेजस Mk1A की पहली बैच 2026 के अंत तक भारतीय वायु सेना को सौंपने की उम्मीदें तेज हुईं। इंजन आपूर्ति में हुई बाधा को ठीक करके परियोजना की गति में सुधार हुआ है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सातवां F404‑IN20 इंजन HAL को मिला
- पहला बैच 2026 के अंत तक IAF को डिलीवर होने की संभावना
- इंजन आपूर्ति में सुधार से परियोजना की गति बढ़ी
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अमेरिकी एरोस्पेस दिग्गज GE एरोस्पेस से सातवां F404‑IN20 इंजन प्राप्त कर तेजस Mk1A कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया। यह इंजन तेजस Mk1A की थ्रस्ट, गति और फुर्ती को सुनिश्चित करता है, जिससे यह लड़ाकू मिशनों में प्रभावी बनता है।
इंजन की समस्या का समाधान
पहले प्राप्त छठे इंजन में तकनीकी गड़बड़ी पाई गई, जिसे भारत में HAL की क्वालिटी जांच के दौरान उजागर किया गया। समस्या की सूचना GE को देने के बाद, कंपनी ने तुरंत मरम्मत कार्य करके इंजन को पुनः कार्यशील बनाया। अब यह इंजन परीक्षणों से गुजर चुका है और संचालन के लिए तैयार है, जिससे उत्पादन लाइन पर भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित हुई।
तेजस Mk1A की उत्पादन तालिका
तेजस Mk1A, भारतीय लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) का उन्नत संस्करण है, जिसमें उन्नत रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और हथियार एकीकरण शामिल है। भारतीय वायु सेना ने 83 यूनिट्स का ऑर्डर दिया है, जिसका उद्देश्य पुराने MiG‑21 विमानों को बदलना है। हालांकि, मूल योजना से दो साल अधिक देरी हुई है, मुख्यतः इंजन आपूर्ति और एकीकरण चुनौतियों के कारण। सातवां इंजन और सुधारित आपूर्ति श्रृंखला इस देरी को कम करने में मदद करेगी।
देशी रक्षा उत्पादन की दिशा
तेजस Mk1A में विदेशी इंजन पर निर्भरता के बावजूद, भारत ने कावेरी जैसी स्वदेशी इंजन परियोजनाओं पर काम जारी रखा है। GE के साथ सहयोग वर्तमान फ्लीट को सशक्त बनाता है, जबकि दीर्घकालिक रूप से स्वदेशी इंजनों की खोज रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगी।
भविष्य की संभावनाएं
यदि HAL शेष एकीकरण और प्रमाणन कार्यों को समय पर पूरा कर लेता है, तो 2026 के अंत तक तेजस Mk1A की पहली बैच IAF को सौंपने की संभावना है। यह न केवल भारतीय वायु सेना की क्षमताओं को बढ़ाएगा, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग के लिए भी एक सकारात्मक संकेत देगा।