एशियन पेंट्स ने 'अक्स-ए-कश्मीर' और 'डोनेट ए वॉल' पहल के माध्यम से कश्मीर की परंपराओं और कहानियों को जीवित कर दिया है। डल झील पर तैरते शिकारे और यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर में विशाल भित्ति चित्र (म्यूरल) कला के अद्भुत संगम हैं।

मुख्य बातें

  • 'अक्स-ए-कश्मीर' पहल के तहत डल झील के 40 शिकारों को कलाकृतियों में बदला गया है।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर में 11,500 वर्ग फुट का विशाल म्यूरल बनाया गया है।
  • यह परियोजना एशियन पेंट्स, St+art फाउंडेशन और XXL कलेक्टिव के सहयोग से की गई है।
  • कलाकृतियों में एशियन पेंट्स के प्रीमियम रंगों और फिनिश का उपयोग किया गया है।

कश्मीर, जिसे अक्सर 'धरती का स्वर्ग' कहा जाता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी गहरी सांस्कृतिक जड़ों के लिए भी जाना जाता है। इस विरासत का सम्मान करते हुए, एशियन पेंट्स ने श्रीनगर में दो ऐतिहासिक सार्वजनिक कला पहल का अनावरण किया है। ये पहल न केवल घाटी के सौंदर्य को दर्शाती हैं, बल्कि यहाँ के लोगों की कलात्मकता और जीवन जीने के तरीके को भी एक नया आयाम देती हैं।

अक्स-ए-कश्मीर: डल झील पर तैरती कला

एशियन पेंट्स ने XXL कलेक्टिव के साथ मिलकर 'अक्स-ए-कश्मीर' नामक एक अनूठी परियोजना शुरू की है। इसके तहत डल झील पर स्थित 40 प्रतिष्ठित शिकारों को तैरते हुए कैनवास में बदल दिया गया है। इन शिकारों को चार समकालीन कलाकारों—ओवैस अहमद, शीहिज कौल, ज़हरा जावेद और श्वेता शर्मा—द्वारा डिजाइन किया गया है, जो कश्मीर की विभिन्न पहचानों और कहानियों को उजागर करते हैं।

इन कलाकृतियों को जीवंत बनाने के लिए Asian Paints Royale Glitz और Apcolite Premium Enamel जैसे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का उपयोग किया गया है, जिससे ये सुबह की धुंध और सूरज की रोशनी में भी चमकते रहते हैं। यह पहल कश्मीर की पारंपरिक शिल्प कौशल और आधुनिक कला का एक बेजोड़ मेल है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की परियोजनाएं केवल सजावट नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने और लुप्त होती परंपराओं को आधुनिक पीढ़ी के सामने रखने का एक सशक्त माध्यम हैं। यह कला के माध्यम से सांस्कृतिक संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

'कला जब परंपरा से मिलती है, तो वह इतिहास को जीवंत बना देती है।'

डोनेट ए वॉल: ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक

इस उत्सव के दूसरे हिस्से के रूप में, 'डोनेट ए वॉल' अभियान के 10वें अध्याय के तहत यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर में एक विशाल भित्ति चित्र (म्यूरल) बनाया गया है। अल्लामा इकबाल लाइब्रेरी बिल्डिंग के अग्रभाग पर बना यह 11,500 वर्ग फुट का म्यूरल विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य "तमसो मा ज्योतिर्गमय" (अंधकार से प्रकाश की ओर) से प्रेरित है।

इसे Asian Paints Apex Ultima Protek का उपयोग करके बनाया गया है, जो इसे कश्मीर की कठिन मौसम परिस्थितियों में भी सुरक्षित और चमकदार बनाए रखेगा। यह परियोजना 18 शहरों के 24 सार्वजनिक स्थानों को बदलने के मिशन का हिस्सा है।

क्या आप जानते हैं?: शिकारा केवल एक नाव नहीं है, बल्कि यह कश्मीर की अर्थव्यवस्था और संस्कृति का एक अभिन्न अंग है, जो सदियों से डल झील की जीवनरेखा बना हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. 'अक्स-ए-कश्मीर' परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य कश्मीर की सांस्कृतिक कहानियों और परंपराओं को डल झील के शिकारों के माध्यम से कलात्मक रूप में प्रस्तुत करना है।

2. यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर में बनाया गया म्यूरल किस प्रेरणा पर आधारित है?
यह म्यूरल विश्वविद्यालय के मंत्र 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' यानी अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रेरणा पर आधारित है।