क्रोमपेट स्टेशन पर नए सबवे के बावजूद पैदल यात्रियों के लिए सीधा रास्ता न होने से छात्र और महिलाएं ट्रेन की पटरियों से गुजरने को मजबूर हैं। हाल ही में एक छात्रा की दुखद मृत्यु के बाद स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा की मांग तेज कर दी है।

मुख्य बातें

  • क्रोमपेट स्टेशन पर राधा नगर और प्लेटफॉर्म के बीच सीधा पैदल मार्ग नहीं है।
  • हाल ही में एक 18 वर्षीय छात्रा की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई।
  • स्थानीय निवासियों ने हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद सुधार न होने पर नाराजगी जताई है।
  • छात्रों और महिलाओं को सुरक्षा के लिए पटरियों पर चलने को मजबूर होना पड़ रहा है।

चेन्नई के क्रोमपेट स्टेशन के पास रहने वाले राधा नगर के निवासियों और यात्रियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। नए सबवे के उद्घाटन के बावजूद, राधा नगर मुख्य सड़क से रेलवे प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए कोई सीधा पैदल मार्ग नहीं बनाया गया है। इस कमी के कारण, विशेष रूप से कॉलेज जाने वाले छात्र और महिलाएं, अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे पटरियों को पार करने के लिए मजबूर हैं।

एक दुखद घटना और बढ़ता आक्रोश

हाल ही में 10 अगस्त को एक हृदयविदारक घटना घटी, जब 18 वर्षीय छात्रा एस. राजश्री, जो कॉलेज के अपने पहले दिन जा रही थी, प्लेटफॉर्म तक पहुँचने के लिए पटरियों को पार करते समय एक एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आ गई। इस घटना ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और परिवारों को झकझोर कर रख दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह दुर्घटना कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे की विफलता का परिणाम है।

बोजोकमीडिया (BozokMedia) विश्लेषण: क्यों यह महत्वपूर्ण है

बोजोकमीडिया विश्लेषण से पता चलता है कि बुनियादी ढांचे का विकास तब तक अधूरा है जब तक वह अंतिम मील तक 'सुरक्षित पहुंच' (Safe Access) सुनिश्चित नहीं करता। हालांकि सबवे का निर्माण किया गया, लेकिन उसे प्लेटफॉर्म 1 और 2 से जोड़ने वाला रास्ता नहीं बनाया गया, जिससे सबवे का मुख्य उद्देश्य ही विफल हो गया। यह समस्या केवल सुविधा की नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा की है।

'जब तक स्टेशन और रिहायशी इलाकों के बीच सुरक्षित पैदल मार्ग नहीं बनता, तब तक रेलवे की आधुनिकता का कोई अर्थ नहीं है।'

स्थानीय नागरिक संघों ने इस संबंध में पहले ही मद्रास उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की थी। अदालत ने रेलवे को छह सप्ताह के भीतर सिफारिशों पर विचार करने का निर्देश दिया था, लेकिन जनवरी में सबवे खुलने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। रेलवे अधिकारियों का तर्क है कि धन की कमी एक बड़ी बाधा है, लेकिन जनता का सवाल है कि क्या बजट सुरक्षा से ऊपर है?

सुरक्षा के लिए क्या समाधान सुझाए गए हैं?

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि राधा नगर की ओर एक एस्केलेटर या लिफ्ट लगाई जाए, क्योंकि वहां पर्याप्त जगह उपलब्ध है। इसके अलावा, स्टेशन रोड पर स्थित कुछ दुकानों को हटाने की भी मांग की गई है जो पैदल मार्ग में बाधा उत्पन्न करती हैं।

क्या आप जानते हैं?: चेन्नई के मीनांबाकम और सादपेत जैसे अन्य स्टेशनों पर सबवे से सीधे प्लेटफॉर्म तक जाने की सुरक्षित व्यवस्था मौजूद है, जो क्रोमपेट में अनुपस्थित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. राधा नगर के लोग पटरियों से क्यों गुजरते हैं?
क्योंकि राधा नगर मुख्य सड़क से रेलवे प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए कोई सीधा और सुरक्षित पैदल रास्ता उपलब्ध नहीं है।

2. क्या इस मामले में कानूनी कार्रवाई की गई है?
हाँ, तांबरम नगर निगम के नागरिक संघों ने मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।