केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिविल एविएशन मंत्रालय व सीआईएसएफ को निर्देश दिया कि पीक ट्रैवल सीजन में तीसरे पक्ष की ऑडिट कर महत्त्वपूर्ण हवाई अड्डों पर यात्रियों की देरी को कम किया जाए। साथ ही स्वचालित ट्रे रिट्रीवल सिस्टम (ATRS) की चरणबद्ध इंस्टॉलेशन की घोषणा की गई।
नई दिल्ली – केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिविल एविएशन मंत्रालय और सेंट्रल इंडस्ट्रियल सेक्योरिटी फोर्स (CISF) को निर्देश दिया कि वे पीक यात्रा अवधि के दौरान सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर तृतीय‑पक्षीय अध्ययन कर यात्रियों की देरी को न्यूनतम करने के लिए उपाय पहचानें। यह निर्देश एक व्यापक समीक्षा बैठक के दौरान आया, जिसमें सिविल एविएशन मंत्री राम मोहन नायडू किनजरा�ुपु, गृह सचिव, इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक, एएआई के चेयरमैन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
पृष्ठभूमि और वर्तमान चुनौतियां
भारत में हवाई यात्रा में निरंतर वृद्धि के साथ सुरक्षा और इमीग्रेशन चेक‑पॉइंट पर भी भीड़भाड़ बढ़ी है। यात्रियों को लंबी कतारों, अतिरिक्त मानव संसाधन की आवश्यकता और अपर्याप्त ब्रीजिंग सुविधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे कुल यात्रा समय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। पिछले कुछ वर्षों में कई रिपोर्टों ने इस मुद्दे को उजागर किया, जिससे सरकार को सुस्पष्ट समाधान की आवश्यकता महसूस हुई।
सरकारी निर्देश और तकनीकी उपाय
शाह ने ऑटोमैटिक ट्रे रिट्रीवल सिस्टम (ATRS) की फेज़्ड इंस्टॉलेशन का आदेश दिया। यह प्रणाली सुरक्षा स्कैनर पर लाए गए ट्रे को स्वचालित रूप से पुनः प्राप्त कर यात्रियों को तेज़ी से आगे बढ़ने में मदद करती है, जिससे सुरक्षा लाइन में भीड़ कम होती है और मानव बल की आवश्यकता घटती है। साथ ही, एयरपोर्ट अथॉरिटी को यात्रियों और विमान ट्रैफ़िक के आधार पर एयरो‑ब्रिज की संख्या निर्धारित करने के लिए मानक स्थापित करने का निर्देश मिला।
बैगेज ड्रॉप और इमीग्रेशन में सुधार
वर्तमान में केवल 16 प्रमुख हवाई अड्डों में उपलब्ध बैगेज ड्रॉप सुविधा को अब उच्च यात्री मात्रा वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों तक विस्तारित किया जाएगा। इमीग्रेशन क्लियरेंस को तेज़ करने के लिए फ़ास्ट ट्रैक इमीग्रेशन‑ट्रस्टेड ट्रैवलर्स प्रोग्राम (FTI‑TTP) को व्यापक रूप से अपनाने की भी सलाह दी गई। इस दिशा-निर्देश में एयरलाइनों को टिकट बुकिंग के समय व्हाट्सएप के माध्यम से यात्रियों को कार्यक्रम में पंजीकरण के लिए प्रेरित करने का आदेश शामिल है।
अपेक्षित प्रभाव और भविष्य की दिशा
इन पहलों के कार्यान्वयन से सुरक्षा प्रक्रियाओं में औसत प्रतीक्षा समय में 30‑40% की कमी आने की उम्मीद है। साथ ही, एयरपोर्ट कर्मियों की कार्यभार में कमी आएगी, जिससे संचालन लागत में भी कमी संभव होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन तकनीकी उपायों को सही समय पर लागू किया गया, तो भारत की हवाई यात्रा की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार होगा।