डिफेंस रिसर्च एंड डवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के पुणे स्थित दो प्रयोगशालाओं ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) को 60 किलोमीटर की न्यूनतम दूरी पर सटीक लक्ष्यभेद के साथ सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह परीक्षण इंटेग्रेटेड टेस्ट रेंज, चंदीपुर में हुआ, जो भारत की स्वदेशी दीर्घ दूरी की रॉकेट तकनीक में मील का पत्थर है।

पुने में स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की दो प्रमुख प्रयोगशालाओं – आर्मामेंट रिसर्च एंड डवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) और हाई एनर्जी मैटरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी (HEMRL) – ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) का 60 किमी न्यूनतम दूरी पर परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह परीक्षण एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चंदीपुर में बुधवार, 8 जुलाई 2026 को आयोजित किया गया, जहाँ रॉकेट ने लक्ष्य पर "पाठ्यपुस्तक सटीकता" के साथ प्रहार किया।

पिनाका LRGR का तकनीकी सारांश

पिनाका प्रणाली मूलतः एक मल्टी‑बारेल रॉकेट लांचर (MBRL) है, जो 12 रॉकेट को 44 सेकंड में सल्वो के रूप में प्रक्षेपित कर सकता है। LRGR को विशेष रूप से लंबी दूरी के लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे फ्रंटलाइन बलों को प्रतिद्वंद्वी के गहरी स्थितियों में प्रवेश करने से पहले ही कमजोर किया जा सके। इस संस्करण को पुणे‑आधारित ARDE और HEMRL ने मिलकर विकसित किया, जबकि हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डवलपमेंट लैबोरेटरी (DRDL) और रिसर्च सेंटर इमरात ने तकनीकी समर्थन प्रदान किया।

पिछला परीक्षण एवं इतिहास

पिनाका का विकास 1980 के दशक के उत्तरार्ध में DRDO द्वारा रूसी ग्रैड प्रणाली के विकल्प के रूप में शुरू हुआ। मार्क‑1 ने 1990 के दशक में सफलता पाई और 1999 के कारगिल युद्ध में पहली बार उपयोग हुआ। इस वर्ष दिसंबर में, पिनाका LRGR ने 120 किमी की अधिकतम दूरी पर अपना पहला परीक्षण किया था, जो इस नई वैरिएंट के दीर्घ दूरी क्षमता को प्रमाणित करता है।

रक्षा मंत्रालय एवं राजनैतिक महत्व

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को "स्वदेशी दीर्घ दूरी गाइडेड रॉकेट डिज़ाइन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर" कहा और DRDO, भारतीय सेना तथा इंडस्ट्री को बधाई दी। DRDO के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने भी परीक्षण पर करीबी नजर रखी और सभी टीमों को बधाई दी। इस सफलता से भारत की आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर) रक्षा तकनीक में नई ऊर्जा का संचार होगा, जिससे रणनीतिक संतुलन में सुधार की उम्मीद है।

आगे का रास्ता

पिनाका LRGR का आगे का चरण कई उपयोगकर्ता‑परिभाषित परिदृश्यों में परीक्षण करना है, जिसमें विभिन्न जलवायु एवं भू‑भौतिकी परिस्थितियों में प्रदर्शन को मान्य करना शामिल है। साथ ही, इस प्लेटफ़ॉर्म को भविष्य में हाइपर‑साउंड म्यूजमेंट या इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) क्षमताओं के साथ एकीकृत करने की संभावनाएँ भी शोध टीमों के सामने हैं।