दिल्ली मेट्रो कॉरिडोर प्रोजेक्ट ने 12.377 किमी की नई रेखा का निर्माण शुरू किया, जिसमें 10 स्टेशन और सात मौजूदा लाइनों से जुड़ाव होगा। यह पूरी तरह भूमिगत विस्तार शहर के केंद्रीय भाग को कवर करेगा, जिससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने गुरुवार को इंदरलोक‑इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर के 12.377 किमी के निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू किया। यह नया खंड पूरी तरह भूमिगत रहेगी और 10 नए स्टेशनों के माध्यम से राजधानी के मध्य भाग को कवर करेगी, साथ ही मौजूदा सात मेट्रो लाइनों से जुड़ाव स्थापित करेगी।
परियोजना का विस्तृत अवलोकन
इस विस्तार में इंदरलोक और इंद्रप्रस्थ को जोड़ने वाले दो प्रमुख टर्मिनल शामिल हैं, जो वर्तमान में दिल्ली के सबसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्थित हैं। कुल 10 स्टेशनों में से कई को रणनीतिक रूप से प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों के निकट स्थित किया गया है, जिससे दैनिक यात्रियों की यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
रणनीतिक महत्व
दिल्ली मेट्रो की यह नई रेखा न केवल मौजूदा नेटवर्क को सुदृढ़ करती है, बल्कि शहर के ट्रैफिक जाम को कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। पिछले दो दशकों में, दिल्ली ने कई मेट्रो चरणों को सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिनमें Phase‑III और Phase‑IV प्रमुख हैं। इस नवीनतम विस्तार से शहर के केंद्रीय व्यापार केंद्र, सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सीधा कनेक्शन स्थापित होगा।
निर्माण तकनीक और समय‑सीमा
DMRC ने इस परियोजना में नवीनतम टनल बोरिंग मशीन (TBM) तकनीक अपनाई है, जिससे भूमिगत कार्य तेजी और सुरक्षा के साथ पूर्ण हो सके। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस 12 किमी के कॉरिडोर को 2027 के मध्य तक पूर्ण किया जा सकता है। निर्माण में उपयोग किए जाने वाले सामग्री, जैसे प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट और मॉड्यूलर स्टेशन डिज़ाइन, भविष्य में रखरखाव को सरल बनाएंगे।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
इस विस्तार से अनुमानित रूप से 2.5 मिलियन अतिरिक्त यात्रियों को प्रतिदिन लाभ मिलेगा, जिससे सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी बढ़ेगी। साथ ही, नई स्टेशनों के आसपास रियल एस्टेट मूल्य में संभावित वृद्धि, स्थानीय व्यवसायों को नई जीवनधारा, और पर्यावरणीय लाभ (कार्बन उत्सर्जन में कमी) की उम्मीद है।
भविष्य की दृष्टि
DMRC ने इस परियोजना को दिल्ली के व्यापक ‘स्मार्ट सिटी’ विज़न के साथ संरेखित किया है। जब यह कॉरिडोर पूरा हो जाएगा, तो शहर की मौजूदा 10+ मेट्रो लाइनों का एकीकृत नेटवर्क यात्रियों को तेज, सुरक्षित और पर्यावरण‑हितैषी विकल्प प्रदान करेगा, जो भारत के शहरी विकास में एक नया मानक स्थापित करेगा।