ट्रू कॉलर और भारत के टेलीकॉम नियामक TRAI के बीच नए स्पैम‑कॉल नियमों को लेकर तीखा विवाद चल रहा है। इस टकराव से भारतीय ग्राहकों को कॉल पहचान सेवाओं की विश्वसनीयता और संभावित प्रतिबंधों पर असर पड़ सकता है।

भारत में ट्रू कॉलर का सबसे बड़ा बाजार है, जहाँ 5 करोड़ से अधिक मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता इस ऐप पर भरोसा करते हैं। हाल ही में TRAI ने 140 और 1600 क्रमांक वाले नंबरों को टेलीमार्केटिंग तथा बैंकिंग कॉल के लिए विशेष रूप से निर्धारित किया, और इन श्रेणियों में कॉल पहचान एप्स को स्पैम चेतावनी देने से रोकने का प्रस्ताव रखा। यह कदम ट्रू कॉलर के समुदाय‑आधारित स्पैम‑डिटेक्शन मॉडल को सीधे चुनौती देता है।

TRAI के नियमों का मुख्य उद्देश्य

2024 में TRAI ने एक व्यापक एंटी‑स्पैम फ्रेमवर्क पेश किया, जिसका लक्ष्य उपयोगकर्ता‑अनजान नंबरों से जुड़ी अनदेखी को कम करना था। 140 क्रमांक टेलीमार्केटिंग कॉल और 1600 क्रमांक बैंकों व वित्तीय संस्थानों की सेवा‑कॉल के लिए निर्धारित किया गया, जिससे उपभोक्ताओं को वैध व्यावसायिक कॉल और अनधिकृत स्पैम कॉल में अंतर करना आसान हो। फरवरी 2025 में इस व्यवस्था को और सख्त किया गया, जिससे सामान्य 10‑अंकीय नंबरों का उपयोग टेलीमार्केटिंग के लिए प्रतिबंधित हो गया।

ट्रू कॉलर की प्रतिक्रिया

ट्रू कॉलर के सीईओ ऋषित झुंझुनवाला ने X (पूर्व ट्विटर) पर कहा कि इन नियमों का कोई तर्क नहीं है और यह “समुदाय‑आधारित सूचना को सेंसर करके बुरे खिलाड़ियों को खुले मैदान में खेलने देगा”। उन्होंने कहा, “बुरे खिलाड़ियों को दंडित किया जाए, न कि उन ऐप्स को जो लाखों भारतीयों को सुरक्षित संचार अनुभव प्रदान करते हैं।” ट्रू कॉलर ने 140 और 1600 क्रमांक वाले कॉलों पर हरे बेज़ (whitelisted) बैज दिखाना जारी रखा, लेकिन स्पैम चेतावनी प्रतिबंधित करने की योजना को विरोध किया।

व्यापारिक प्रभाव और संभावित परिणाम

ट्रू कॉलर की आय मुख्यतः विज्ञापन और स्वाइगी, उबर जैसे साझेदारियों पर निर्भर है, क्योंकि अधिकांश भारतीय उपयोगकर्ता ऐप के लिए भुगतान नहीं करते। यदि TRAI के ड्राफ्ट नियम लागू हो जाते हैं, तो ट्रू कॉलर को सेक्शन 79 के सुरक्षित‑शरण अधिकार से वंचित किया जा सकता है, जिससे ऐप को तीसरे पक्ष की सामग्री के लिए कानूनी जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी। इससे कंपनी के विज्ञापन राजस्व और उपयोगकर्ता‑विश्वास दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

भविष्य की राह

TRAI‑ट्रू कॉलर टकराव का समाधान इस बात पर निर्भर करेगा कि नियामक किस हद तक तृतीय‑पक्ष ऐप्स को नियमन में शामिल करेंगे और क्या वे वैध व्यावसायिक कॉल की पहचान को कमजोर किए बिना स्पैम‑कॉल को दबा पाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नियामक समुदाय‑आधारित डेटा को पूरी तरह से बाहर रखेगा, तो स्पैम‑कॉल की समस्या और बढ़ सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक धोखाधड़ी का सामना करना पड़ेगा। इस बीच, उपयोगकर्ता अपने फोन सुरक्षा सेटिंग्स को सुदृढ़ करने और आधिकारिक बैंक नंबरों की जाँच करने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।