एक नवीनतम शोध ने दिखाया है कि माता‑पिता की अत्यधिक स्मार्टफ़ोन आदतें बच्चों में असुरक्षित जुड़ाव, आत्म‑विश्वास की कमी और भविष्य की रिश्तों में कठिनाइयाँ पैदा कर सकती हैं।
स्मार्टफ़ोन ने हमारे दैनिक जीवन को बदल दिया है, लेकिन अब शोधकर्ता यह संकेत दे रहे हैं कि इस तकनीक के नकारात्मक प्रभाव केवल बच्चों तक सीमित नहीं रहकर माता‑पिता की आदतों तक भी पहुँच रहे हैं। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के मनोवैज्ञानिक डॉन ग्रांट के नेतृत्व में किए गए एक व्यापक अध्ययन ने 600 अमेरिकी किशोरों (12‑17 वर्ष) के उत्तरों को विश्लेषित किया और पाया कि जब बच्चे महसूस करते हैं कि उनके माता‑पिता फोन में व्यस्त हैं, तो वे असुरक्षित जुड़ाव (insecure attachment) विकसित करने की अधिक संभावना रखते हैं।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष
शोधकर्ताओं ने बताया कि असुरक्षित जुड़ाव का परिणाम कम आत्म‑विश्वास, निकट संबंध बनाने में कठिनाई और जोखिम लेने से बचाव के रूप में प्रकट होता है—जो वयस्कावस्था में व्यक्तिगत और पेशेवर सफलता को बाधित कर सकता है। ग्रांट ने कहा, “यह जुड़ाव की सुरक्षा को जीवन भर के लिए नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।”
पारिवारिक गतिशीलता में ‘टेक्नोफ्रेंस’ की भूमिका
‘टेक्नोफ्रेंस’ (technoference) शब्द उस व्यवधान को दर्शाता है जो डिजिटल डिवाइस के उपयोग से व्यक्तिगत बातचीत में आता है। पहले के शोध मुख्यतः वयस्कों के बीच इस प्रभाव को देखते थे, लेकिन यह अध्ययन पहली बार बच्चों के दृष्टिकोण से इस घटना को उजागर करता है। 2024 में प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में 50% अमेरिकी किशोरों ने कहा कि उनके माता‑पिता अक्सर फोन में व्यस्त रहते हैं, जबकि वही माता‑पिता इस बात को स्वीकार करने से कतराते हैं।
इतिहास और भविष्य की दिशा
पिछले दशकों में स्क्रीन टाइम पर बहस मुख्यतः बच्चों के खुद के उपयोग पर केंद्रित रही है। अब जबकि प्लेटफ़ॉर्म जैसे मेटा, टिकटॉक और स्नैप को किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, इस शोध ने एक नया आयाम जोड़ा है—वयस्कों के स्क्रीन उपयोग का बच्चों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव। यह संकेत देता है कि भविष्य के नियामक कदम केवल युवा उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे परिवार के डिजिटल व्यवहार को भी लक्षित करेंगे।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
डिजिटल युग में माता‑पिता की उपस्थिति केवल शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी होनी चाहिए। इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि स्क्रीन के पीछे छिपी असहजता बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक विकास को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना बढ़ती है।
माता‑पिता के लिए व्यावहारिक सुझाव
पूरी तरह फोन बंद करना व्यावहारिक नहीं है, परंतु ‘डिजिटल डिनर’ जैसे नियम बनाकर, स्क्रीन‑फ़्री समय निर्धारित करके और बच्चों के साथ संवाद के दौरान फोन को दूर रखकर माता‑पिता अपने जुड़ाव की गुणवत्ता सुधार सकते हैं। इस प्रकार, ‘कम स्क्रीन, अधिक जुड़ाव’ सिद्धांत को अपनाना बच्चों के भावनात्मक सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बन सकता है।