ईस्टर्न रेलवे की सील्डा डिवीजन ने सात सीमित‑ऊँचाई वाली सबवे बनाकर पादचारी और वाहन ट्रैक पार करने को समाप्त करने का कदम उठाया है। ये संरचनाएँ रेनघट‑गेडे, बांगालो‑पेट्रापोल आदि प्रमुख क्षेत्रों में स्थापित होंगी, जिससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा और गतिशीलता में सुधार होगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सील्डा डिवीजन ने सात नई सबवे परियोजनाओं को मंजूरी दी
- सबवे रेनघट‑गेडे, बांगालो‑पेट्रापोल सहित सात प्रमुख ट्रैक‑पारिंग बिंदुओं पर बनेंगी
- परियोजना पादचारी सुरक्षा, आपातकालीन पहुंच और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को सुदृढ़ करेगी
ईस्टर्न रेलवे की सील्डा डिवीजन ने 13 जून 2026 को सात सीमित‑ऊँचाई वाली सबवे निर्माण के प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी। यह कदम उन क्षेत्रों में पादचारी और वाहन ट्रैक पार करने की निरंतर समस्या को समाप्त करने के लिए उठाया गया है, जहाँ वैध लेवल‑क्रॉसिंग गेट्स की दूरी कई किलोमीटर तक है।
परियोजना का उद्देश्य
डिवीजनल रेलवे मैनेजर (DRM) राजीव सक्सेना ने कहा, “सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। ये सबवे केवल बुनियादी ढाँचा नहीं, बल्कि जीवन रक्षा में दीर्घकालिक निवेश हैं।” उनका मानना है कि ग्रेड‑सेपरेशन द्वारा पादचारी और स्थानीय वाहनों को रेलवे ट्रैक के नीचे सुरक्षित रूप से गुजरने का अवसर मिलेगा, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम घटेगा।
स्थापित स्थान
सर्वेक्षण एवं फूटप्लेट निरीक्षण के बाद सात रणनीतिक बिंदुओं का चयन किया गया: अरंगहाटा‑बहरीगच्छी (रनघट‑गेडे सेक्शन), बगुला‑बानपुर (रनघट‑गेडे), करंजली‑एनसीपीएम (लक्ष्मीकांतपुर‑नामखाना), सोनारपुर‑बारूपुर (SPR‑BDYP), काकडविप‑उकीलेरहाट (लक्ष्मीकांतपुर‑नामखाना), बांगालो‑पेट्रापोल और कृष्णनगर‑सान्तिपुर सेक्शन। इन स्थानों पर मोटरसाइकिल, ई‑रिक्शा, चार‑पहिया वाहन और पादचारी अनधिकृत पारिंग करते थे, क्योंकि निकटवर्ती लेवल‑क्रॉसिंग नहीं थे।
सुरक्षा और सामाजिक प्रभाव
सबवे की निर्माण सामग्री reinforced concrete बॉक्स संरचना होगी, जो ट्रैक और सड़क के बीच पूर्ण अलगाव प्रदान करेगी। इससे न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि आपातकालीन सेवाओं (एम्बुलेंस, फायर‑ब्रिगेड) की पहुँच भी तेज होगी। स्थानीय समुदायों को स्कूल, अस्पताल, बाजार और सरकारी कार्यालयों तक सुरक्षित रूप से पहुँचने का नया मार्ग मिलेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों में भी उछाल की उम्मीद है।
आगे का मार्ग
डिज़ाइन चरण समाप्त होते ही ठेकेदारों को कार्य आरंभ करने का आदेश दिया गया है। अनुमानित पूर्णता अवधि दो साल है, जिसके बाद इन सबवे का उपयोग स्थानीय लोगों द्वारा नियमित रूप से किया जाएगा। इस पहल को भारत सरकार के “सुरक्षित रेलवे” मिशन के साथ तालमेल में देखा जा रहा है, जो राष्ट्रीय स्तर पर रेल सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।