विसाखापत्तनम में भारत के दो महान अभियांत्रिकी आयकों – के.एल. राव और पद्मभूषण डॉ. विश्वेश्वरैया – की प्रतिमाओं का अनावरण हुआ। इस कार्यक्रम ने युवा इंजीनियरों को प्रेरित करने के साथ-साथ ₹1.5 करोड़ की CSR सहायता की घोषणा भी की।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • डॉ. के.एल. राव और सर एम. विश्वेश्वरैया की प्रतिमाओं का अनावरण हुआ
  • तिरुत्री कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव ने ₹1.5 करोड़ CSR समर्थन का वादा किया
  • विसाखापत्तनम में नई निर्मित विश्वेश्वरैया भवन में जल संरक्षण और सिंचाई पर तकनीकी सत्र आयोजित हुए

विसाखापत्तनम में संस्थान ऑफ़ इंजीनियर्स (इंडिया) के स्थानीय केंद्र ने बुधवार को भारत के दो अभियांत्रिकी दिग्गजों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो पद्म भूषण डॉ. के.एल. राव और भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया के जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बना। नई निर्मित विश्वेश्वरैया भवन में आयोजित इस समारोह में प्रतिमाओं का अनावरण और पुनर्स्थापन किया गया, जिससे शहर के युवा इंजीनियरों में राष्ट्रीय गौरव की भावना जागृत हुई।

प्रतिमाओं का अनावरण और प्रमुख अतिथियों की भूमिका

तेरहवां जुलाई को तिरुत्री कांग्रेस राज्य अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव, गाजुवाका विधायक और तेलुगु देशम पार्टी राज्य अध्यक्ष, ने डॉ. के.एल. राव की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने इस पहल को युवा पीढ़ी को इंजीनियरिंग के प्रति प्रेरित करने के लिए महत्वपूर्ण माना और बताया कि इस प्रकार के स्मारक भविष्य के नवाचारियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे। साथ ही उन्होंने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से लगभग ₹1.5 करोड़ जुटाने का वादा किया, जिससे विश्वेश्वरैया भवन के शेष निर्माण कार्य में तेजी लाई जा सके।

सर एम. विश्वेश्वरैया की प्रतिमा का पुनर्स्थापन

पूर्व जेएनटीयू-जीवी कुलपति प्रो. के. वेंकट सुब्बैया ने सर एम. विश्वेश्वरैया की प्रतिमा को पुनर्स्थापित किया। उन्होंने विश्वेश्वरैया की जल-सिंचाई, औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व योगदान का उल्लेख किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उनकी दृष्टि आज भी भारत के विकास की नींव में प्रमुख है।

तकनीकी सत्र और प्रमुख चर्चाएं

समारोह के दौरान दो प्रमुख तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रो. वी. वेंकटेश्वर राव ने आंध्र प्रदेश में सतत माइक्रो-स्तरीय जल संरक्षण रणनीतियों पर प्रकाश डाला, जबकि इ. सत्यनारायण राजू ने डॉ. के.एल. राव की सिंचाई विरासत और पोलनावारम-पेन्ना नदी-लिंकिंग परियोजना के तकनीकी पहलुओं की गहन चर्चा की। इन सत्रों ने उपस्थित इंजीनियर, शैक्षणिक और छात्र वर्ग को अत्याधुनिक ज्ञान प्रदान किया।

भविष्य की दिशा और सामाजिक प्रभाव

इस कार्यक्रम ने न केवल अभियांत्रिकी के इतिहास को स्मरण कराया, बल्कि भविष्य में जल संसाधन प्रबंधन, सतत विकास और युवा प्रेरणा के लिए एक मंच स्थापित किया। स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार की पहलें सामाजिक जिम्मेदारी, शिक्षा और तकनीकी नवाचार को एकजुट करती हैं, जिससे भारत की विकास यात्रा में नया आयाम जुड़ता है।