यूरोपीय आयोग ने भारत को सेमीकंडक्टर अनुसंधान और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बताया है। भारत का विशाल कुशल कार्यबल वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • यूरोपीय आयोग ने भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक भरोसेमंद और महत्वपूर्ण भागीदार माना है।
  • भारत का विशाल और कुशल टैलेंट पूल चिप अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए महत्वपूर्ण है।
  • भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 'सेमीकॉन 2.0' कार्यक्रम को मंजूरी दी है।
  • भारत और EU ने AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी और 6G में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।

ब्रसेल्स में आयोजित तीसरे भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की बैठक के बाद, यूरोपीय आयोग की कार्यकारी उपाध्यक्ष हेना विर्ककुनेन ने भारत के साथ सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ अपनी चिप आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन (resilience) बढ़ाने के लिए भारत जैसे भरोसेमंद भागीदारों के साथ काम करना चाहता है।

वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला और भारत की भूमिका

यूरोपीय आयोग ने अपनी 'चिप्स 2.0' पहल के माध्यम से यूरोप में चिप निर्माण क्षमता विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। विर्ककुनेन के अनुसार, सेमीकंडक्टर उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला अत्यंत जटिल और संवेदनशील है। किसी एक देश या स्रोत पर निर्भरता कम करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण अनिवार्य है। इस संदर्भ में, भारत का विशाल और अत्यधिक कुशल टैलेंट पूल, जो सेमीकंडक्टर अनुसंधान और विकास (R&D) में सक्षम है, यूरोपीय संघ के लिए एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में उभरा है।

सेमीकॉन 2.0: भारत का महत्वाकांक्षी कदम

भारत ने भी अपनी घरेलू चिप क्षमता को बढ़ाने के लिए कमर कस ली है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसादा ने जानकारी दी कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लगभग $13.25 बिलियन (₹1.27 लाख करोड़) के परिव्यय के साथ 'सेमीकॉन 2.0' (Semicon 2.0) कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। यह कार्यक्रम चिप डिजाइन, निर्माण उपकरण, आवश्यक रसायनों, गैसों और फैब्रिकेशन इकाइयों की स्थापना पर केंद्रित होगा। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण का एक प्रमुख केंद्र बनाना है।

AI और भविष्य की तकनीक पर साझा दृष्टिकोण

नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट की सफलता की सराहना करते हुए, यूरोपीय आयोग ने कहा कि भारत और EU दोनों का लक्ष्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों को सुलभ और विश्वसनीय बनाना है। दोनों पक्षों ने उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग, क्वांटम प्रौद्योगिकियों और 6G के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की है। यह साझेदारी न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि वैश्विक तकनीकी संप्रभुता सुनिश्चित करने में भी मदद करेगी।