यूक्रेन और पश्चिम एशिया के लंबे संघर्षों ने सटीक हथियारों की आवश्यकता को उजागर किया है, जबकि उनकी महँगी कीमत दीर्घकालिक लड़ाइयों में बाधा बनती है। भारत और अमेरिका जैसी महाशक्तियों ने कम लागत वाले स्मार्ट म्यूनीशन और क्रूज़ मिसाइल विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कम लागत वाले सटीक हथियार दीर्घकालिक संघर्षों में प्रमुख बनेंगे।
  • अमेरिका ने अगले पाँच सालों में 28,000 किफायती क्रूज़ मिसाइलें खरीदने की योजना बनाई है।
  • भारत भी ग्लाइड बॉम्ब और लैंड एटैक क्रूज़ मिसाइल जैसे विकल्प विकसित कर रहा है।

यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों ने पारंपरिक बड़े पैमाने के बमबारी की जगह सटीक, तेज़ और स्केलेबल प्रिसिशन हथियारों को प्राथमिकता दी है। अब युद्ध का दायरा केवल बड़े बमबारी से नहीं, बल्कि छोटे, सटीक और कम लागत वाले म्यूनीशन से तय हो रहा है, जिससे विरोधी की प्रतिक्रिया समय घटता है। इस परिवर्तन का मूल कारण दो प्रमुख कारक हैं: लागत‑प्रभावशीलता और उत्पादन गति।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

द्वितीय विश्व युद्ध के समय हजारों बमवर्षाव आम थे, जबकि आज की युद्ध रणनीतियों में “सर्जिकल स्ट्राइक” का महत्व बढ़ा है। भारत‑पाकिस्तान के बीच 2022‑23 के तनाव में भारतीय ने पाकिस्तान के प्रमुख हवाई अड्डों और रडार साइटों पर सटीक मिसाइलें दागी, जिससे प्रतिपक्ष ने शांति की ओर झुकाव दिखाया। लेकिन ऐसी सटीक स्ट्राइक की लागत अक्सर बहुत अधिक होती है, जिससे दीर्घकालिक उपयोग व्यावहारिक नहीं रहता।

कम लागत वाले विकल्पों का उदय

रूस ने चार साल से अधिक समय तक चल रहे यूक्रेन संघर्ष में अपने मौजूदा रक्षा उद्योग को पुनः व्यवस्थित कर ग्लाइड बॉम्ब किट जैसे सस्ते समाधान विकसित किए। इसी तरह, भारत ने “तारा”, “गौरव” और “गौतम” जैसे ग्लाइड बॉम्ब विकसित करके पारंपरिक बमों को सटीक लक्ष्य तक पहुँचाने की क्षमता प्रदान की है। ये नई तकनीकें महँगे ब्रह्मोस् जैसे उच्च‑स्तरीय हथियारों की जगह ले सकती हैं।

अमेरिका की नई रणनीति

अमेरिकी वायु सेना ने “फैम‑एम (Family of Affordable Mass Missiles)” कार्यक्रम के तहत अगले पाँच वर्षों में लगभग 28,000 किफायती क्रूज़ मिसाइलें खरीदने की योजना बनाई है। इस पहल में तीन प्रकार की मिसाइलें शामिल हैं: FAMM‑L (विमानों के हार्डपॉइंट से सीधे लॉन्च), FAMM‑P (कार्गो विमानों के लिए पैलेट‑आधारित) और FAMM‑BAR (दीर्घ दूरी के लिए)। योजना का मुख्य उद्देश्य तेज़ उत्पादन, बड़े पैमाने पर तैनाती और कम कीमत में उच्च प्रिसिशन सुनिश्चित करना है।

भविष्य की संभावनाएँ

जब युद्ध का स्वरूप बदल रहा है, तो सस्ते, तेज़ और सटीक हथियारों की मांग भी बढ़ेगी। भारत ने 45 दिनों के conventional म्यूनीशन स्टॉक को 45‑दिन की “स्मार्ट” म्यूनीशन स्टॉक में बदलने की संभावनाओं पर पुनः विचार किया है। इसी प्रकार, यूरोप और एशिया में कई देशों ने किफायती प्रिसिशन हथियारों में निवेश को प्राथमिकता दी है, जिससे भविष्य में बड़े‑पैमाने की लड़ाइयों में लागत‑प्रबंधन एक प्रमुख रणनीतिक कारक बन जाएगा।