टेक्सास के स्टारबेस में स्पेसएक्स की सबसे बड़ी रॉकेट स्टारशिप का 13वां परीक्षण उड़ान इंजन विफलता के कारण रद्द कर दिया गया। इस विफलता का असर नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम और भविष्य के अंतरिक्ष यात्राओं पर पड़ सकता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- स्टारशिप का लॉन्च इंजन विफलता के कारण रद्द हुआ
- NASA के आर्टेमिस मिशन में स्टारशिप की महत्वपूर्ण भूमिका
- अगली उड़ान के लिए कई दिनों में पुनः प्रयास की योजना
टेक्सास के स्टारबेस में 16 जुलाई 2026 को स्पेसएक्स की 407 फीट ऊँची, 33 मुख्य इंजन वाली स्टारशिप ने लिफ्ट‑ऑफ़ के एक सेकंड पहले ही इग्निशन प्रक्रिया को रोक दिया। एपी द्वारा प्रदान किए गए ड्रोन फुटेज में दिखाया गया कि कुछ इंजन अचानक बंद हो गए, जबकि रॉकेट पैड से जुड़ी रही। इस अचानक रद्दीकरण के बाद लॉन्च टीम ने तुरंत ईंधन को खाली करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
पृष्ठभूमि और महत्व
स्टारशिप, जो अब तक का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली रॉकेट माना जाता है, अपनी 13वीं परीक्षण उड़ान के लिए तैयार थी। इस उड़ान में 20 नवीनतम स्टारलिंक उपग्रहों को लॉन्च करने की योजना थी, साथ ही रॉकेट के हीट शील्ड की तस्वीरें खींचने और पृथ्वी की कक्षा में मौजूदा स्टारलिंक के साथ संचार परीक्षण करने की भी। यह परीक्षण मिशन न केवल स्पेसएक्स की पुन: उपयोगी रॉकेट तकनीक को परख रहा था, बल्कि नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम में स्टारशिप को लुनर लैंडर के रूप में उपयोग करने की तैयारी में भी एक महत्वपूर्ण कदम था।
NASA और आर्टेमिस कार्यक्रम पर प्रभाव
नासा ने स्टारशिप को अपने आगामी आर्टेमिस III मिशन के लिए चुना है, जिसमें 2025‑26 में पहले मानव को चंद्रमा की सतह पर उतारने की योजना है। इस मिशन के सफल होने के लिए स्टारशिप को विश्वसनीय रूप से लांच करना अनिवार्य है, क्योंकि यह भविष्य के आर्टेमिस IV मिशन में दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में दो अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने की भी आधारशिला होगी। स्टारशिप की इस विफलता ने न केवल स्पेसएक्स को तकनीकी समस्याओं का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए मजबूर किया, बल्कि नासा के शेड्यूल को भी प्रभावित कर सकता है।
आगे का मार्ग
एलोन मस्क ने X (पूर्व ट्विटर) पर कहा कि "अगला लॉन्च प्रयास कुछ दिनों में" हो सकता है। कंपनी के इंजीनियर वर्तमान में इंजन की विफलता के कारणों की जांच कर रहे हैं, ताकि अगली उड़ान में समान समस्या न दोहराई जाए। इस बीच, ब्लू ओरिजिन की लूनर लैंडर "ब्लू मून" भी समान समय सीमा में तैयार होनी है, जिससे अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा तेज़ी से आगे बढ़ेगी।