केरल के कासरागोड जिले में बॅटरी ऊर्जा संग्रह प्रणाली (BESS) परियोजनाओं को अक्टूबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। ऊर्जा मंत्री सनी जोसेफ ने सभी एजेंसियों को समय सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने का आदेश दिया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मायलटी BESS परियोजना अक्टूबर 2026 में कमिशन होगी
  • 125 MW/500 MWh क्षमता वाला पहला चार‑घंटे बैटरी स्टोरेज भारत में
  • प्रोजेक्ट दो चरणों में पूरा होगा – मायलटी (125 MW) और मुल्लेरिया (15 MW)

केरल राज्य में बिजली की कमी को देखते हुए, बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने कासरागोड जिले में चल रही BESS परियोजनाओं की स्थिति का आकलन किया। मुल्लेरिया सबस्टेशन में स्थित मायलटी BESS को 16 अक्टूबर, 2026 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि 15 अक्टूबर, 2026 को मुल्लेरिया 15 MW परियोजना पूर्ण होने की उम्मीद है। दोनों परियोजनाओं को केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEBL) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें JSW Energy और Opera Energy ने बिल्ड‑ओन‑ऑपरेट (BOO) मॉडल अपनाया है।

तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (Historical Background)

भारत में बैटरी ऊर्जा संग्रह प्रणाली का विकास 2010 के दशक के अंत में शुरू हुआ, जब राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा नीति ने सौर और पवन ऊर्जा को ग्रिड स्थिरता के साथ संयोजित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। पहले बड़े पैमाने पर स्थापित BESS प्रोजेक्ट दक्षिण भारत में 2021 में शुरू हुए थे, परन्तु मायलटी परियोजना चार‑घंटे की बैटरी क्षमता के साथ भारत में पहली है, जो तेज़ ऊर्जा संतुलन प्रदान करती है।

Why This Matters (इसके मायने क्या हैं)

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह परियोजना केरल की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, विशेषकर शाम के पीक लोड के दौरान सौर ऊर्जा को संग्रहित करके आपूर्ति को स्थिर रखेगी। इससे KSEBL को महँगी आयातित बिजली की खरीद से बचाव होगा और राज्य की वित्तीय बोझ कम होगी।

सामान्य नागरिकों के लिए इसका सीधा लाभ बेहतर विद्युत विश्वसनीयता, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार, तथा कृषि और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में ऊर्जा की स्थिरता में निहित है। दीर्घकालिक 12‑वर्षीय परियोजना जीवन के साथ, यह निवेश केरल के औद्योगिक विकास को भी समर्थन देगा।

"BESS तकनीक का सही उपयोग नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड में सुरक्षित रूप से एकीकृत करने की कुंजी है," कहते हैं ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. अनीता रॉय।
परियोजनाक्षमताभार (MWh)डिलीवरी तिथि
मायलटी (220 kV)125 MW500 MWh16 अक्टूबर 2026
मुल्लेरिया (110 kV)15 MW60 MWh15 अक्टूबर 2026
क्या आप जानते हैं? (Did You Know?): भारत में स्थापित पहला चार‑घंटे बैटरी स्टोरेज 2020 में मुंबई में परीक्षण किया गया था, लेकिन मायलटी परियोजना इसे व्यावसायिक स्तर पर लागू करने वाली पहली है।

Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: BESS का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: यह दिन के समय उत्पन्न अतिरिक्त सौर ऊर्जा को संग्रहित कर शाम के पीक लोड में आपूर्ति करता है, जिससे ग्रिड स्थिरता और लागत में कमी आती है।

प्रश्न 2: इस परियोजना से राज्य की वित्तीय स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: आयातित महँगी बिजली की जरूरत घटने से राज्य की ऊर्जा खर्च में उल्लेखनीय बचत होगी, जिससे बजट पर सकारात्मक असर पड़ेगा।