जंतर मंतर में इंटरनेट बंद होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने ब्लूटूथ‑मेश आधारित ऐप्स से एक‑दूसरे को संदेश भेजे। यह लेख इन तकनीकों के काम करने के तरीके और उनकी सीमाओं को स्पष्ट करता है।

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मुख्य बिंदु

  • इंटरनेट बंद होने पर भी संदेश भेजने वाले ब्लूटूथ‑मेश ऐप्स
  • Bridgefy, Briar, Bitchat प्रमुख ऐप्स के रूप में उभरे
  • ऐप्स की रेंज सीमित, नेटवर्क में कई उपयोगकर्ता आवश्यक

दिल्ली के जंतर मंतर में चल रहे CJP और छात्र विरोध के दौरान एक नई तकनीकी चर्चा छिड़ गई है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उन्होंने ऐसे मैसेजिंग एप्लिकेशन इस्तेमाल किए जो इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के बिना काम करते हैं। इस कारण पुलिस को संदेशों को ट्रैक करना कठिन हो गया है।

इन ऐप्स का मूल सिद्धांत ब्लूटूथ मेष नेटवर्क है। प्रत्येक स्मार्टफोन एक छोटे टावर की तरह कार्य करता है और पास के अन्य फोन से जुड़कर संदेश को कई चरणों में आगे बढ़ाता है। यदि दो फोन 50‑100 मीटर के भीतर हैं, तो संदेश सीधा पहुँच जाता है; अगर दूरी अधिक है तो बीच के अन्य उपयोगकर्ता संदेश को रीले करते हैं।

वर्तमान में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाले ऐप्स हैं Bridgefy, Briar और Bitchat। Bridgefy ब्लूटूथ के जरिए निकटस्थ फोन को जोड़ता है, Briar इंटरनेट उपलब्ध होने पर TOR नेटवर्क का उपयोग करता है और नेटवर्क न होने पर ब्लूटूथ‑Wi‑Fi Direct के माध्यम से संचार करता है, जबकि Bitchat कोई फोन नंबर या सर्वर नहीं माँगता और पूरी तरह से मेष तकनीक पर निर्भर रहता है।

इन तकनीकों की सीमाएँ भी हैं। ब्लूटूथ की रेंज सीमित (लगभग 100 मीटर) है और संदेश को आगे बढ़ाने के लिए समान ऐप वाले कई उपयोगकर्ता होना आवश्यक है। इसलिए यह विश्व‑स्तर पर व्हाट्सएप जैसी त्वरित सेवा नहीं है, लेकिन इंटरनेट बंद होने पर संचार का वैकल्पिक साधन बन जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ब्लूटूथ मेष नेटवर्क का प्रयोग पहले प्राकृतिक आपदाओं—जैसे भूकंप और बाढ़—के दौरान किया गया था, जब मोबाइल टावर बंद हो जाते थे। कई देशों में आपातकालीन संचार के लिए इन ऐप्स को आधिकारिक रूप से अपनाया गया है, जिससे उनका भरोसा बढ़ा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the adoption of mesh‑based messaging in protests signals a shift toward decentralized communication, making state surveillance harder and empowering grassroots coordination.

"Mesh networking offers resilience, but it also raises new challenges for law enforcement and digital privacy," says Dr. Ananya Verma, cybersecurity researcher.
Did You Know?: The first Bluetooth mesh specification was released by the Bluetooth SIG in 2017, primarily for industrial IoT applications.

Frequently Asked Questions

Q1: क्या ये ऐप्स पूरी तरह सुरक्षित हैं?

A: सुरक्षा स्तर ऐप पर निर्भर करता है; कुछ एन्क्रिप्शन प्रदान करते हैं, परन्तु फिज़िकल ट्रैकिंग अभी भी संभव है।

Q2: क्या इन्हें सामान्य स्मार्टफ़ोन पर डाउनलोड किया जा सकता है?

A: हाँ, ये ऐप्स अक्सर गूगल प्ले या एप्पल ऐप स्टोर पर उपलब्ध होते हैं, लेकिन कुछ सीमित देशों में ही मिलते हैं।