लक्ष्मी मशीन वर्क्स (LMW), जो मुख्य रूप से कपड़ा मशीनें बनाती है, अब इसरो के सबसे शक्तिशाली रॉकेटों के लिए महत्वपूर्ण कार्बन-फाइबर संरचनाएं तैयार कर रही है। यह साझेदारी दिखाती है कि कैसे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र अंतरिक्ष विज्ञान में योगदान दे रहा है।
मुख्य बातें
- लक्ष्मी मशीन वर्क्स (LMW) इसरो के LVM3 रॉकेट के लिए 'पेयलोड फेयरिंग' बनाती है।
- यह कंपनी दुनिया की उन चुनिंदा कंपनियों में से एक है जो उन्नत कार्बन-फाइबर कंपोजिट बनाती है।
- LMW का उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्र (ATC) उच्च-प्रदर्शन वाले एयरोस्पेस घटक तैयार करता है।
पहली नज़र में, लक्ष्मी मशीन वर्क्स (LMW) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) दो बिल्कुल अलग दुनिया के लगते हैं। जहाँ एक कंपनी भारत के कपड़ा उद्योग को चलाने वाली मशीनें बनाती है, वहीं दूसरी अंतरिक्ष में उपग्रहों को भेजती है। लेकिन, इन दोनों के बीच एक गहरा और तकनीकी संबंध है जो भारत के सबसे भारी रॉकेटों की सफलता के लिए अनिवार्य है।
कपड़ा उद्योग से एयरोस्पेस तक का सफर
1962 में कोयंबटूर में स्थापित, LMW भारत के कपड़ा मिलों का एक प्रमुख स्तंभ है। हालांकि, कंपनी के परिसर के भीतर छिपा LMW एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेंटर (ATC) एक अत्याधुनिक एयरोस्पेस विनिर्माण सुविधा है। यह केंद्र इसरो के LVM3 (पूर्व में GSLV Mk-III) रॉकेट के शीर्ष पर लगने वाले 10.75 मीटर ऊंचे 'पेयलोड फेयरिंग' (एयरोडायनामिक नोज कोन) का निर्माण करता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
जब रॉकेट हाइपरसोनिक गति से वायुमंडल से गुजरता है, तो अत्यधिक गर्मी और कंपन उपग्रहों को नष्ट कर सकते हैं। BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि LMW द्वारा निर्मित यह कार्बन-कंपोजिट सुरक्षा कवच उपग्रहों को इन विनाशकारी ताकतों से बचाता है। लगभग 110 किलोमीटर की ऊंचाई पर, यह कवच अलग हो जाता है, जिससे उपग्रह सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष की यात्रा जारी रख पाते हैं।
LMW की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता ने साबित कर दिया है कि भारत की पारंपरिक विनिर्माण क्षमताएं अब वैश्विक अंतरिक्ष मानकों को टक्कर दे रही हैं।
LMW केवल फेयरिंग ही नहीं, बल्कि रॉकेट के संवेदनशील नेविगेशन सिस्टम की रक्षा करने वाले 'इक्विपमेंट बे श्राउड्स' और क्रायोजेनिक टैंकों को जोड़ने वाले हल्के संरचनात्मक सदस्यों का भी निर्माण करता है। इसके लिए कंपनी उच्च-तकनीकी ऑटोक्लेव (Autoclave) मशीनों का उपयोग करती है, जो 250°C तक के तापमान और 10 बार के दबाव पर कंपोजिट घटकों को मजबूती प्रदान करती हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
LMW ने दशकों तक कपड़ा स्पिनिंग मशीनरी में अपनी महारत हासिल की। इसी सटीक इंजीनियरिंग कौशल को उन्होंने कार्बन-फाइबर तकनीक में स्थानांतरित किया, जो आज स्टील्थ विमानों और अगली पीढ़ी के लॉन्च वाहनों में उपयोग की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: LMW इसरो के लिए क्या बनाता है?
उत्तर: LMW मुख्य रूप से रॉकेट के लिए कार्बन-फाइबर पेलोड फेयरिंग और अन्य महत्वपूर्ण एयरोस्पेस संरचनाएं बनाता है।
प्रश्न 2: पेलोड फेयरिंग का क्या काम है?
उत्तर: यह रॉकेट के शीर्ष पर लगा एक सुरक्षा कवच है जो उपग्रहों को लॉन्च के दौरान अत्यधिक गर्मी और दबाव से बचाता है।