वैज्ञानिकों ने अल्जीरिया में मिले एक विशेष 'शेरगोटाइट' उल्कापिंड के जरिए मंगल ग्रह के इतिहास के एक खाली पन्ने को भर दिया है। यह पत्थर 1.273 अरब साल पुराना है, जो मंगल के ज्वालामुखी इतिहास की नई जानकारी देता है।

मुख्य बातें

  • अल्जीरिया में मिला NWA 13441 नामक पत्थर मंगल के इतिहास की एक महत्वपूर्ण कमी को पूरा करता है।
  • यह पत्थर 1.273 अरब साल पुराना है, जो शर्गाटाइट (shergottite) वर्ग का पहला ऐसा नमूना है।
  • यह खोज मंगल के ज्वालामुखी और मेंटल (mantle) की गतिविधियों को समझने में मदद करेगी।

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जो मंगल ग्रह के भूवैज्ञानिक इतिहास की हमारी समझ को बदल सकती है। 2019 में अल्जीरिया के रफ़सा के पास मिले एक गहरे हरे रंग के पत्थर, जिसे NWA 13441 नाम दिया गया है, की उम्र अब 1.273 अरब वर्ष निर्धारित की गई है। यह खोज विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मंगल के 'शेरगोटाइट' उल्कापिंडों के इतिहास में एक बहुत बड़े अंतराल को भरती है।

इतिहास के खाली पन्ने का भरना

अब तक, हमारे पास मौजूद अधिकांश शेरगोटाइट उल्कापिंड या तो 600 मिलियन वर्ष से कम पुराने थे या फिर लगभग 2.4 बिलियन वर्ष पुराने थे। इनके बीच के समय में मंगल से आया कोई भी शेरगोटाइट अब तक नहीं मिला था। NWA 13441 ठीक इसी अंतराल के बीच में आता है, जो मंगल की ज्वालामुखी सक्रियता के एक नए अध्याय को खोलता है।

यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक पत्थर नहीं, बल्कि मंगल के गर्भ का एक संदेशवाहक है। यह पत्थर बताता है कि मंगल के मेंटल (mantle) के भीतर मैग्मा के स्रोत कैसे थे। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मैग्मा या तो मंगल के किसी ऐसे हिस्से से आया है जिसे हमने पहले कभी नहीं देखा, या फिर यह दो अलग-अलग रासायनिक भंडारों के मिश्रण का परिणाम है।

यह खोज साबित करती है कि मंगल का इतिहास जितना हम सोचते हैं, उससे कहीं अधिक जटिल और विविधतापूर्ण है।

इस पत्थर की रासायनिक संरचना, विशेष रूप से इसमें मौजूद लौह और मैंगनीज का अनुपात, इसे स्पष्ट रूप से मंगल का निवासी सिद्ध करता है। साथ ही, इसमें मौजूद 'शॉक प्रेशर' के निशान बताते हैं कि यह एक भीषण प्रभाव के कारण मंगल की सतह से उखड़कर अंतरिक्ष में भेजा गया था।

प्राचीन इतिहास और वैज्ञानिक पद्धति

वैज्ञानिकों ने इस पत्थर की आयु का पता लगाने के लिए समैरियम-नियोडिमियम (Samarium-Neodymium) आइसोटोप तकनीक का उपयोग किया। यह एक अत्यंत सटीक प्रक्रिया है जो खनिज के क्रिस्टलीकरण के समय को मापती है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह आयु उस समय की है जब पत्थर मंगल पर बना था, न कि उस समय की जब यह पृथ्वी पर गिरा।

क्या आप जानते हैं?: मंगल के उल्कापिंडों का अध्ययन करना पृथ्वी के इतिहास को समझने जैसा है, क्योंकि ग्रहों का विकास अक्सर समान भौतिक नियमों का पालन करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. शेरगोटाइट क्या है?
शेरगोटाइट मंगल ग्रह से आने वाले उल्कापिंडों का सबसे प्रमुख और सामान्य वर्ग है।

2. यह पत्थर अल्जीरिया में क्यों मिला?
सहारा रेगिस्तान के शुष्क और खुले मैदानों में गहरे रंग के उल्कापिंड आसानी से दिखाई दे जाते हैं, जिससे उन्हें खोजना सरल हो जाता है।