प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वर्ष में 10 मिलियन भारतीय युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रशिक्षण देने की योजना पेश की। यह पहल मौजूदा AI स्किलिंग को विस्तार देती है और एयरोस्पेस, खेल, हरित गतिशीलता जैसे उभरते सेक्टरों में अवसरों को उजागर करती है।
मुख्य बिंदु
- 10 मिलियन युवाओं को AI प्रशिक्षण मिलेगा
- मौजूदा स्किलिंग प्रयासों का विस्तार
- एयरलाइन, खेल, हरित गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में अवसर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सप्ताह एक प्रमुख घोषणा की, जिसमें अगले 12 महीनों में 10 मिलियन भारतीय युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम को भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और युवा रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
यह पहल मौजूदा AI स्किलिंग पहलों, जैसे कि राष्ट्रीय AI कौशल मिशन, को व्यापक बनाती है। सरकार ने कहा है कि प्रशिक्षण विभिन्न स्तरों पर होगा, जिसमें बुनियादी सिद्धांत से लेकर उन्नत अनुप्रयोग तक शामिल हैं।
मोदी ने विशेष रूप से एयरोस्पेस, खेल, हरित गतिशीलता और अन्य उभरते सेक्टरों में संभावनाओं को उजागर किया। इन क्षेत्रों में AI का उपयोग उत्पादन को बढ़ाने, पर्यावरणीय प्रभाव को घटाने और नई नौकरियों के सृजन में मदद करेगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले पाँच वर्षों में भारत ने AI में कई पहलें शुरू की हैं, जैसे कि 2018 की राष्ट्रीय AI रणनीति और 2020 में AI स्किलिंग केंद्रों की स्थापना। इन प्रयासों ने शुरुआती चरण में 2 मिलियन से अधिक छात्रों को AI शिक्षा प्रदान की, लेकिन इस नई योजना के साथ लक्ष्य को दोगुना किया गया है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि AI कौशल का विस्तार न केवल भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक डिजिटल बाजार में उसकी स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा। यह पहल आर्थिक विकास और सतत विकास लक्ष्यों दोनों को समर्थन देती है।
"AI साक्षरता भारत के भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए आवश्यक है," कहा गया है एक प्रमुख प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ ने।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: प्रशिक्षण की अवधि कितनी होगी?
उत्तर: यह एक वर्ष के भीतर विभिन्न मॉड्यूल के रूप में वितरित किया जाएगा, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सत्र शामिल हैं।
प्रश्न 2: कार्यक्रम को कैसे वित्तपोषित किया जाएगा?
उत्तर: वित्तपोषण का मुख्य स्रोत केंद्रीय सरकार का बजट होगा, साथ ही निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से योगदान अपेक्षित है।