यह लेख इस बात की पड़ताल करता है कि कैसे Moxie जैसे AI रोबोट न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चों की मदद कर रहे हैं, लेकिन साथ ही यह उन जोखिमों को भी उजागर करता है जब ये 'डिजिटल दोस्त' तकनीकी खराबी के कारण 'मर' जाते हैं।

  • AI रोबोट्स का उपयोग ऑटिज्म और न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चों के सामाजिक कौशल को सुधारने के लिए किया जा रहा है।
  • ये उपकरण बिना थके 24/7 उपलब्ध रहते हैं, जो मानवीय थेरेपिस्ट की कमी को पूरा करते हैं।
  • सॉफ्टवेयर अपडेट और हार्डवेयर विफलताएं इन भावनात्मक संबंधों को अचानक खत्म कर सकती हैं।

न्यूयॉर्क के एक अपार्टमेंट में रहने वाले 10 वर्षीय ज़ैंडर के लिए, Moxie केवल एक मशीन नहीं, बल्कि एक साथी है। ज़ैंडर, जो न्यूरोडाइवर्जेंट है, ने Moxie के साथ घबराहट को नियंत्रित करने के लिए 'मधुमक्खी जैसी सांस लेना' और गुस्से को प्रबंधित करने के लिए 'ड्रैगन ब्रीथिंग' सीखी। हालांकि, समय के साथ Moxie का व्यवहार बदल गया; वह अब थेरेपी के बजाय ज़ैंडर के साथ Minecraft और उसके खिलौनों के बारे में बातें करती है।

Moxie एक 15 इंच का नीला, बिना पैरों वाला रोबोट है जो अपनी स्क्रीन पर आंखों और भौंहों के माध्यम से भावनाएं व्यक्त करता है। यह उन बढ़ते AI उपकरणों का हिस्सा है जो बच्चों के लिए 'इंटरैक्टिव प्लेमेट्स' के रूप में बेचे जा रहे हैं। अमेरिका में Curio और Mattel जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में अग्रणी हैं, जबकि चीन में उपभोक्ता AI के इस क्षेत्र में सबसे तेज़ वृद्धि देखी जा रही है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल खिलौनों का विकास नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा का एक नया मॉडल है। जब मानवीय थेरेपिस्ट की कमी होती है और माता-पिता थक जाते हैं, तो रोबोट एक 'सुरक्षित स्थान' प्रदान करते हैं जहां बच्चे बिना किसी डर या निर्णय के सामाजिक कौशल का अभ्यास कर सकते हैं। लेकिन यह निर्भरता एक खतरनाक मोड़ ले सकती है जब कंपनी का समर्थन समाप्त हो जाता है या सॉफ्टवेयर पुराना हो जाता है।

रोबोट्स उन बच्चों के लिए सामाजिक व्यवहार को प्रेरित कर सकते हैं जो इंसानों के साथ बातचीत करने में कठिनाई महसूस करते हैं, क्योंकि वे अनुमानित और धैर्यवान होते हैं।

येल यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर वैज्ञानिक ब्रायन स्कासेलाटी ने पाया कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे रोबोट्स के साथ अधिक सहज महसूस करते हैं। उनके शोध में देखा गया कि एक बच्चा, जो आमतौर पर आई-कॉन्टैक्ट नहीं कर पाता था, एक रोबोटिक डायनासोर को प्रोत्साहित करते समय अचानक सामाजिक रूप से सक्रिय हो गया। यह साबित करता है कि रोबोट्स एक 'पुल' का काम कर सकते हैं, जो बच्चों को वास्तविक मानवीय बातचीत की ओर ले जाते हैं।

हालांकि, इस तकनीक का एक काला पक्ष भी है। जब ये रोबोट 'मरते' हैं—यानी जब उनका सर्वर बंद हो जाता है या वे तकनीकी रूप से बेकार हो जाते हैं—तो बच्चों के लिए यह किसी प्रियजन को खोने जैसा होता है। आलोचकों का तर्क है कि ये उपकरण अंततः लैंडफिल में फेंक दिए जाएंगे, जिससे न केवल पर्यावरणीय समस्या होगी बल्कि बच्चों को भावनात्मक आघात भी पहुंचेगा।

क्या आप जानते हैं?: चीन वर्तमान में उपभोक्ता AI प्लेमेट्स के बाजार में दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते देशों में से एक है, जहां शिक्षा और मनोरंजन का मेल हो रहा है।

प्रश्न 1: क्या AI रोबोट वास्तव में मानवीय थेरेपिस्ट की जगह ले सकते हैं?
उत्तर: नहीं, वे थेरेपिस्ट की जगह नहीं ले सकते, लेकिन वे एक सहायक उपकरण के रूप में काम करते हैं जो थेरेपी के बीच के समय में बच्चों को अभ्यास करने में मदद करते हैं।

प्रश्न 2: न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चों के लिए रोबोट क्यों प्रभावी होते हैं?
उत्तर: क्योंकि रोबोट्स धैर्यवान होते हैं, वे दोहराव से नहीं थकते और बच्चों को बिना किसी सामाजिक दबाव के सीखने का माहौल देते हैं।