अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड के वितरण में हितों के टकराव की खबरों के बाद, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने चयन प्रक्रिया में और अधिक सुरक्षा उपाय जोड़ने की बात कही है।

  • RDI फंड के पहले दौर में चयन पैनल के सदस्यों से जुड़े कंपनियों को फंडिंग मिलने के बाद विवाद खड़ा हुआ।
  • केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता स्वीकार की।
  • ₹1 लाख करोड़ के इस फंड का उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देना है।

नई दिल्ली में आयोजित वैज्ञानिकों के सचिवों की मासिक बैठक के दौरान, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। यह बयान उस जांच रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें खुलासा हुआ था कि फंड के पहले दौर के लिए चुनी गई 22 निजी कंपनियों में से 15 कंपनियों के साथ चयन पैनल के सदस्यों के निवेश संबंध थे।

हालांकि, संबंधित पैनल सदस्यों ने अपने हितों की घोषणा कर दी थी और प्रभावित कंपनियों के मूल्यांकन से खुद को अलग (recuse) कर लिया था, लेकिन इस मामले ने मौजूदा प्रणाली में और अधिक कड़े सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को रेखांकित किया है। मंत्री सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार प्रक्रिया को और मजबूत करने के लिए सुझावों के लिए तैयार है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की भविष्य की तकनीकी संप्रभुता इस ₹1 लाख करोड़ के फंड पर टिकी है। यदि चयन प्रक्रिया में विश्वसनीयता की कमी होती है, तो यह न केवल निजी क्षेत्र के भरोसे को तोड़ेगा बल्कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे क्वांटम कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की प्रगति को भी बाधित कर सकता है।

हितों के टकराव को रोकने के लिए केवल स्व-घोषणा पर्याप्त नहीं है; एक स्वतंत्र निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।

RDI फंड का लक्ष्य अगले छह वर्षों में ₹1 लाख करोड़ का कोष बनाना है। यह फंड क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु कार्रवाई जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में काम करने वाली निजी कंपनियों को कम लागत पर लंबी अवधि के ऋण प्रदान करने के लिए बनाया गया है। पहले दौर में, 22 कंपनियों के लिए ₹2,192 करोड़ के ऋण स्वीकृत किए गए थे।

मंत्रालय ने कहा कि सरकार इस बात के प्रति सचेत है कि सार्वजनिक वित्तपोषण के इस ढांचे में निजी क्षेत्र की भागीदारी एक नया अनुभव है। इसलिए, गति, जिम्मेदारी और हितधारकों के विश्वास के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य है। दूसरे दौर के लिए कंपनियों का चयन किया जा चुका है, लेकिन इसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत सरकार ने हाल के वर्षों में 'डीप टेक' को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के स्तंभ के रूप में पहचान दी है। RDI फंड इसी रणनीति का हिस्सा है, जो पारंपरिक बैंकिंग से हटकर उच्च-जोखिम, उच्च-पुरस्कार वाले अनुसंधान क्षेत्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

Did You Know?: RDI फंड के तहत कंपनियां अपने प्रोजेक्ट की कुल लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत ऋण के रूप में प्राप्त कर सकती हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: RDI फंड का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग और रोबोटिक्स जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अनुसंधान करने वाली निजी कंपनियों को सस्ता ऋण प्रदान करना है।

प्रश्न 2: विवाद का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: विवाद का कारण चयन पैनल के सदस्यों के निवेश संबंधों वाली कंपनियों को फंड मिलना था।