भारत के एआई मॉडल वैश्विक स्तर पर सबसे किफायती तो हैं, लेकिन तकनीकी क्षमताओं के मामले में वे अमेरिका और चीन से काफी पीछे हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया में एआई का बड़ा उपभोक्ता तो है, लेकिन निर्माता नहीं।

  • भारत के दो एआई मॉडल (Sarvam) दुनिया में सबसे सस्ते विकल्पों में से हैं।
  • तकनीकी क्षमता के मामले में भारत दुनिया के 11 एआई देशों में 9वें स्थान पर है।
  • भारत का 94% एआई कार्य अमेरिका और चीन द्वारा निर्मित मशीनों पर निर्भर है।
  • भारतीय एआई मॉडल वर्तमान में वैश्विक दिग्गजों से लगभग दो साल पीछे हैं।

हालिया डेटा और Artificial Analysis की रिपोर्ट से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भारत, जो दुनिया का एक प्रमुख तकनीकी केंद्र माना जाता है, एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के मामले में एक विरोधाभास का सामना कर रहा है। भारत में निर्मित एआई मॉडल दुनिया में सबसे सस्ते तो हैं, लेकिन तकनीकी कौशल और बुद्धिमत्ता के मामले में वे सबसे कमजोर श्रेणी में आते हैं।

बेंगलुरु स्थित कंपनी Sarvam द्वारा विकसित 'Sarvam 105B' भारत का सबसे उन्नत मॉडल है। हालांकि, बेंचमार्किंग स्कोरबोर्ड पर इसका प्रदर्शन काफी निराशाजनक है। जहाँ दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मॉडल Anthropic के Claude Opus 5 का स्कोर 63.1 है, वहीं भारत के इस मॉडल का स्कोर मात्र 11.9 है। यह अंतर स्पष्ट करता है कि भारतीय एआई तकनीक अभी भी शुरुआती दौर में है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल तकनीकी अंतर नहीं है, बल्कि यह भारत की डिजिटल संप्रभुता का मुद्दा है। जब भारत का 94% एआई कार्य अमेरिकी और चीनी मॉडलों पर निर्भर होता है, तो देश की डेटा सुरक्षा और निर्णय लेने की क्षमता उन देशों के नियंत्रण में आ जाती है।

भारत एआई का सबसे बड़ा उपभोक्ता तो बन रहा है, लेकिन निर्माता बनने की दौड़ में अभी बहुत पीछे है।

आंकड़े बताते हैं कि भारत दुनिया का 10वां सबसे बड़ा एआई बाजार है, लेकिन यहाँ उपयोग किए जाने वाले 51% मॉडल अमेरिका से और 43% चीन से आते हैं। भारत ने अब तक केवल दो मॉडल पेश किए हैं, जबकि अमेरिका ने 113 और चीन ने 91 नए मॉडल बाजार में उतारे हैं।

मॉडल/देशस्कोर (100 में से)विशेषता
Claude Opus 5 (USA)63.1दुनिया का सर्वश्रेष्ठ
Kimi K3 (China)59.7चीन का सर्वश्रेष्ठ
Sarvam 105B (India)11.9सबसे सस्ता विकल्प

हालांकि, विशेषज्ञों के बीच इस पर मतभेद हैं। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी का तर्क है कि भारत को बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की दौड़ में भाग लेने के बजाय 'एप्लिकेशन लेयर' पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनके अनुसार, भारत दुनिया की 'एआई उपयोग-मामला राजधानी' (AI use-case capital) बन सकता है।

लेकिन एक बड़ी चुनौती भाषा की है। वर्तमान वैश्विक बेंचमार्क तमिल, मराठी या भोजपुरी जैसी भारतीय भाषाओं की दक्षता को नहीं मापते। Sarvam जैसी कंपनियों का लक्ष्य इसी अंतर को पाटना है, जिससे स्थानीय भाषाओं में एआई का उपयोग सुगम हो सके।

Did You Know?: भारत में 80% से अधिक कर्मचारी नियमित रूप से काम पर एआई का उपयोग कर रहे हैं, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है।

Frequently Asked Questions

1. भारत का सबसे शक्तिशाली एआई मॉडल कौन सा है?
वर्तमान में, बेंगलुरु की कंपनी Sarvam द्वारा निर्मित 'Sarvam 105B' भारत का सबसे उन्नत मॉडल माना जाता है।

2. भारत एआई के क्षेत्र में पीछे क्यों है?
मुख्य कारण अनुसंधान और विकास (R&D) में भारी निवेश की कमी और अमेरिका व चीन के मुकाबले बहुत कम नए मॉडलों का विकास करना है।