केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने चेन्नई में आयोजित BRICS विज्ञान और प्रौद्योगिकी बैठक में वैश्विक सहयोग पर जोर दिया। भारत ने 2026 की अपनी अध्यक्षता के लिए 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' का विषय चुना है।

  • भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता करेगा।
  • मुख्य विषय: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता।
  • उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे क्वांटम मिशन और सुपरकंप्यूटिंग पर ध्यान।
  • ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तकनीकी सहयोग का आह्वान।

चेन्नई में आयोजित 14वें BRICS विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) मंत्रिस्तरीय बैठक में, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने वैश्विक मंच पर भारत की महत्वाकांक्षी दृष्टि को साझा किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उभरती हुई प्रौद्योगिकियां प्रगति के अभूतपूर्व अवसर पैदा कर रही हैं, लेकिन इनका लाभ उठाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है ताकि नवाचार सुलभ, किफायती और विश्वसनीय बना रहे।

डॉ. सिंह ने घोषणा की कि भारत ने 2026 में अपनी BRICS अध्यक्षता के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय चुना है: 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability)। यह विषय इस विश्वास को दर्शाता है कि विज्ञान और तकनीक को केवल विकास के लिए नहीं, बल्कि मानवता की सेवा और समावेशी विकास के लिए काम करना चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का यह कदम वैश्विक दक्षिण (Global South) के नेतृत्व की ओर एक बड़ा संकेत है। BRICS देशों के पास विशाल जनसंख्या और वैज्ञानिक प्रतिभा है, जो मिलकर एक ऐसा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बना सकते हैं जो पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को चुनौती दे सके।

मंत्री ने उन्नत सामग्री, जैव प्रौद्योगिकी, फोटोनिक्स, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग जैसी महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की। उन्होंने भारत के प्रमुख राष्ट्रीय मिशनों का उल्लेख किया, जिनमें राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (DPI) शामिल हैं। ये पहल दर्शाती हैं कि भारत तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

तकनीकी नवाचार को केवल विकसित देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर सुलभ और टिकाऊ बनाना होगा।

भारत ने अपने BRICS भागीदारों को अनुसंधान वित्तपोषण, प्रतिभा गतिशीलता और स्टार्टअप साझेदारी जैसे क्षेत्रों में गहरे सहयोग के लिए आमंत्रित किया है। इससे एक ऐसा भविष्य-तैयार बुनियादी ढांचा तैयार होगा जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा है। भारत की आगामी अध्यक्षता 2026 में इस समूह के भीतर तकनीकी और वैज्ञानिक कूटनीति को एक नई दिशा देने की क्षमता रखती है।

Did You Know?: भारत का 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) दुनिया भर के देशों के लिए एक रोल मॉडल बन रहा है।

Frequently Asked Questions

1. भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता का मुख्य विषय क्या है?
मुख्य विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' है।

2. डॉ. जितेंद्र सिंह ने किन प्रमुख तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही?
उन्होंने क्वांटम मिशन, सुपरकंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया।