फार्मर्स फॉर फॉरेस्ट की सह-संस्थापक कृतिका रविशंकर ने बताया कि कैसे एआई और ड्रोन तकनीक का उपयोग करके लाखों पेड़ों की सेहत और कार्बन अवशोषण का सटीक डेटा एकत्र किया जा रहा है। यह तकनीक कृषि-वानिकी (Agroforestry) को किसानों के लिए अधिक लाभदायक बना रही है।

  • कृतिका रविशंकर के नेतृत्व में 'फार्मर्स फॉर फॉरेस्ट' (F4F) लाखों पेड़ों की निगरानी के लिए ड्रोन और AI का उपयोग कर रहा है।
  • एग्रोफोरेस्ट्री मॉडल से किसान प्रति एकड़ 2 लाख से 6 लाख रुपये तक कमा सकते हैं।
  • तकनीक के माध्यम से कार्बन क्रेडिट और सटीक डेटा संग्रह को संभव बनाया जा रहा है।

भारत में जलवायु परिवर्तन के खतरों के बीच, तकनीक और प्रकृति का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। फार्मर्स फॉर फॉरेस्ट (F4F) की सह-संस्थापक और कार्यकारी निदेशक, कृतिका रविशंकर ने हाल ही में एक साक्षात्कार में खुलासा किया कि कैसे अत्याधुनिक तकनीक, जैसे कि ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वनीकरण प्रयासों को एक नए स्तर पर ले जा रही है।

कृतिका रविशंकर, जिनके पास विश्व बैंक और J-PAL जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम करने का अनुभव है, ने बताया कि F4F का लक्ष्य केवल पेड़ लगाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो आर्थिक रूप से टिकाऊ हो। उनका मॉडल किसानों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने पर केंद्रित है, जिससे वे पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदार बन सकें।

एग्रोफोरेस्ट्री: किसानों के लिए मुनाफे का नया जरिया

F4F का एग्रोफोरेस्ट्री कार्यक्रम गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और झारखंड में फैला हुआ है। इस मॉडल के तहत, किसान फल देने वाले पेड़ों, परागणकों के लिए झाड़ियों और सीमा पर इमारती लकड़ी वाले पेड़ों को उगाते हैं। यह विविधता न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, बल्कि किसानों की आय में भी भारी वृद्धि करती है। कृतिका के अनुसार, किसान प्रति एकड़ 2 लाख से 6 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं।

तकनीक की शक्ति: ड्रोन और एआई का जादू

जब पेड़ लगाए जाते हैं, तो F4F की टीम ड्रोन का उपयोग करती है। ये ड्रोन पेड़ों की संख्या, उनकी ऊंचाई, प्रजाति और उनके स्वास्थ्य का डेटा एकत्र करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह तकनीक यह भी माप सकती है कि प्रत्येक पेड़ समय के साथ कितना कार्बन सोख रहा है।

बिना तकनीक के, लाखों पेड़ों की सटीक निगरानी करना और कार्बन अवशोषण का डेटा एकत्र करना लगभग असंभव होता।

ड्रोन से प्राप्त छवियों को एआई मॉडल में डाला जाता है, जो न केवल पेड़ों की सेहत बल्कि सिंचाई पाइपों की लंबाई और भूमि पर मौजूद आक्रामक प्रजातियों (invasive species) की भी पहचान कर सकता है। यह डेटा कार्बन-ऑफसेट फंडिंग प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक निवेशक सटीक और पारदर्शी डेटा की मांग करते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि भविष्य में पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रहेगा। एआई और ड्रोन जैसी तकनीकों का एकीकरण कार्बन मार्केट को अधिक विश्वसनीय बनाएगा, जिससे ग्रामीण समुदायों को सीधे वैश्विक जलवायु वित्त (Climate Finance) से जोड़ा जा सकेगा।

Did You Know?: एआई मॉडल एक एकड़ के भूमि क्षेत्र के लिए अलग-अलग कोणों से लगभग 12,000 चित्र ले सकता है ताकि सटीक डेटा प्राप्त हो सके।

Frequently Asked Questions

1. एग्रोफोरेस्ट्री किसानों की आय कैसे बढ़ाती है?
एग्रोफोरेस्ट्री में विभिन्न प्रकार की फसलें और पेड़ एक साथ उगाए जाते हैं, जिससे किसान को फल, लकड़ी और अन्य कृषि उत्पादों से निरंतर आय मिलती है।

2. कार्बन क्रेडिट में ड्रोन की क्या भूमिका है?
ड्रोन पेड़ों की वृद्धि और कार्बन सोखने की क्षमता का सटीक डेटा प्रदान करते हैं, जो कार्बन क्रेडिट प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रमाण है।