राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के संस्थापकों के साथ संवाद किया और भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनाने का संकल्प दोहराया।

  • पीएम मोदी ने अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को वैश्विक प्रतिभा को आकर्षित करने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने का आह्वान किया।
  • भारत की ताकत इसकी लागत-प्रभावशीलता, गहरी प्रतिभा और उच्च जोखिम सहने की क्षमता है।
  • स्काईरूट एयरोस्पेस जैसे स्टार्टअप्स अब मासिक रॉकेट लॉन्च की क्षमता हासिल करने की ओर बढ़ रहे हैं।
  • सरकार ने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नीतिगत निरंतरता और अटूट समर्थन का आश्वासन दिया।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (23 अगस्त) के ऐतिहासिक अवसर पर, जो चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग की याद दिलाता है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र के दिग्गजों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में 20 प्रमुख अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के सीईओ शामिल हुए, जिनमें स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के संस्थापक भी शामिल थे।

प्रधानमंत्री ने युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि भारत को केवल एक भागीदार नहीं, बल्कि एक वैश्विक अंतरिक्ष केंद्र (Global Space Hub) बनना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्टार्टअप्स को एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना चाहिए जो दुनिया भर की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को भारत की ओर आकर्षित करे। मोदी ने कहा, "मुझे विश्वास है कि आप लोगों के कारण हम पूरी वैश्विक प्रतिभा को यहाँ खींच सकते हैं, और यही हमारी असली ताकत बनेगी।"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल सरकारी नियंत्रण में नहीं है, बल्कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से यह एक बहु-अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। लागत-कुशलता और तकनीकी नवाचार के मेल से भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा रहा है।

"भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त इसकी लागत-प्रभावशीलता, गहरी प्रतिभा और उच्च जोखिम सहने की क्षमता में निहित है।" - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

बैठक के दौरान, स्टार्टअप संस्थापकों ने अत्याधुनिक परियोजनाओं पर अपनी प्रगति साझा की। इनमें वैश्विक ग्राउंड-स्टेशन नेटवर्क स्थापित करना, उपग्रह इंजन बनाना, अंतरिक्ष कचरा हटाने वाले रोबोटिक्स का विकास और कक्षीय डॉकिंग (Orbital Docking) जैसी महत्वपूर्ण तकनीकें शामिल हैं। एक स्टार्टअप ने तो सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) वातावरण में दवाओं के निर्माण पर भी शोध की जानकारी दी।

स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन चन्दना ने अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनके पास वर्तमान में तीन कारखाने हैं जो प्रति माह एक रॉकेट बनाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने लक्ष्य रखा है कि अगले वर्ष के मध्य तक वे प्रति माह एक लॉन्च करने में सक्षम होंगे, और भविष्य में एक दिन में कई लॉन्च करने का सपना रखते हैं।

स्टार्टअप नेताओं ने 2020 में निजी क्षेत्र के लिए दरवाजे खोलने के बाद से सरकार की सहायक नीतियों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार नीतियों में निरंतरता बनाए रखेगी ताकि निवेशकों का विश्वास बना रहे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत का अंतरिक्ष सफर 1960 के दशक में साइकिल पर रॉकेट के पुर्जे ढोने से शुरू हुआ था। आज, इसरो (ISRO) की सफलता और निजी स्टार्टअप्स के उदय के साथ, भारत चंद्रमा और मंगल से आगे बढ़कर अब अंतरिक्ष में विनिर्माण और वाणिज्यिक उपग्रह सेवाओं का नेतृत्व कर रहा है।

Frequently Asked Questions

1. राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस कब मनाया जाता है?
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस हर साल 23 अगस्त को मनाया जाता है, जो चंद्रयान-3 की लैंडिंग की वर्षगांठ है।

2. अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका क्या है?
निजी कंपनियां रॉकेट लॉन्च, उपग्रह निर्माण और अंतरिक्ष डेटा विश्लेषण जैसी सेवाओं के माध्यम से भारत को एक वैश्विक अंतरिक्ष हब बनाने में मदद कर रही हैं।