तमिलनाडु के कृष्णागिरी में कलेक्टर सी. दिनेश कुमार ने जन शिकायतों के ड्राफ्टिंग के लिए एक उन्नत एआई इंटरफेस पेश किया है। यह तकनीक महज 15 सेकंड में आवाज को लिखित याचिका में बदलकर मुख्यमंत्री पोर्टल पर अपलोड कर सकती है।
- कृष्णागिरी कलेक्ट्रेट में एआई-आधारित याचिका ड्राफ्टिंग का ट्रायल शुरू।
- यह तकनीक वॉयस डिक्टेशन (आवाज) को 15 सेकंड के भीतर याचिका में बदल देती है।
- लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) का उपयोग करके शिकायतों को स्वतः वर्गीकृत किया जाएगा।
- सफल परीक्षण के बाद इस मॉडल को पूरे तमिलनाडु में लागू किया जा सकता है।
तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में प्रशासनिक कार्यों को डिजिटल युग में ले जाते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सोमवार को, कलेक्ट्रेट में कलेक्टर सी. दिनेश कुमार ने जन शिकायतों के प्रबंधन के लिए एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित इंटरफेस का परीक्षण शुरू किया। यह प्रणाली न केवल शिकायतों को लिखने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें मुख्यमंत्री पोर्टल पर अंतिम नंबरिंग तक पहुँचाने की प्रक्रिया को भी स्वचालित करेगी।
तकनीकी नवाचार और कार्यप्रणाली
यह एआई इंटरफेस लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) पर आधारित है, जो वॉयस डिक्टेशन (आवाज द्वारा निर्देश) को तुरंत एक औपचारिक याचिका में बदल सकता है। वर्तमान में, कलेक्टर को हर सप्ताह 500 से 800 याचिकाएं प्राप्त होती हैं। पहले, नागरिकों को याचिका लिखने के लिए शुल्क देना पड़ता था या मदद लेनी पड़ती थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया मात्र 15 सेकंड में पूरी हो जाएगी।
प्रणाली तीन मुख्य तरीकों से काम करती है: पहला, अस्पष्ट हस्तलिखित दस्तावेजों को स्कैन करके स्पष्ट बनाना; दूसरा, वॉयस डिक्टेशन के माध्यम से शिकायत दर्ज करना; और तीसरा, सीधे लिखित याचिकाओं को अपलोड करना। एआई मॉडल को जिले की संरचना, जैसे 10 यूनियन और 8 तालुकों, और विभिन्न सरकारी विभागों की श्रेणियों के साथ प्रशिक्षित किया गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह पहल 'डिजिटल इंडिया' के सपने को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक जटिल कागजी कार्रवाई और तकनीकी भाषा के कारण अपनी आवाज उठाने में असमर्थ रहते हैं। यह एआई टूल उस भाषाई और तकनीकी बाधा को समाप्त कर देता है, जिससे शासन और जनता के बीच की दूरी कम होती है।
यह तकनीक नौकरशाही की जटिलताओं को कम कर सीधे नागरिक-केंद्रित शासन (Citizen-centric governance) की ओर एक बड़ा कदम है।
परीक्षण के दौरान, एक आवेदक द्वारा सुनने की मशीन (hearing-aid) के लिए की गई मौखिक मांग को एआई ने तुरंत पहचान लिया, उसे सही विभाग (दिव्यांगजन कल्याण विभाग) को आवंटित किया और महज 15 सेकंड में पंजीकरण संख्या जारी कर दी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण पिछले दशक में तेजी से बढ़ा है। जहाँ पहले शिकायतों के लिए लंबी कतारों और कागजी फाइलों का सहारा लेना पड़ता था, वहीं अब 'डिजिटल इंडिया' अभियान के तहत ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृष्णागिरी का यह प्रयोग इस दिशा में एक अत्याधुनिक प्रयोग है जो भविष्य के स्मार्ट गवर्नेंस मॉडल की नींव रख सकता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह सेवा नागरिकों के लिए मुफ्त है?
हाँ, इसका उद्देश्य नागरिकों को शुल्क देकर याचिका लिखवाने की परेशानी से मुक्ति दिलाना है।
प्रश्न 2: इस तकनीक का अगला चरण क्या है?
तीन सप्ताह के परीक्षण और सुधार के बाद, इस मॉडल को पूरे राज्य में लागू करने के लिए मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा।