सूर्य से एक शक्तिशाली M6.9 सौर ज्वाला और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) का विस्फोट हुआ है, जिससे पृथ्वी पर भू-चुंबकीय हलचल और उत्तरी रोशनी (Aurora) दिखने की संभावना बढ़ गई है।
- सूर्य के सक्रिय सनस्पॉट 4513 से M6.9 श्रेणी की शक्तिशाली सौर ज्वाला निकली।
- इस विस्फोट के कारण अफ्रीका, यूरोप और आर्कटिक में रेडियो संचार में बाधा आई।
- शुक्रवार (28 अगस्त) तक पृथ्वी पर CME के पहुंचने की संभावना है।
- सौर हवाओं और CME के मिलन से अरोरा (Northern Lights) दिखने के आसार हैं।
आज, 25 अगस्त को, सूर्य ने एक अत्यंत शक्तिशाली M6.9 सौर ज्वाला का उत्सर्जन किया है, जो पृथ्वी की ओर मुख किए हुए एक अशांत सनस्पॉट क्षेत्र से निकली है। इस विस्फोट के साथ ही एक कोरोनल मास इजेक्शन (CME) भी अंतरिक्ष में छोड़ा गया है, जो सीधे पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है।
SpaceWeatherLive के आंकड़ों के अनुसार, यह M6.9 ज्वाला सक्रिय सनस्पॉट क्षेत्र 4513 से उत्पन्न हुई और सुबह 6 बजे (EDT) अपने चरम पर पहुंची। पिछले 24 घंटों में यह क्षेत्र विशेष रूप से सक्रिय रहा है, जिसने पाँच शक्तिशाली M-श्रेणी के विस्फोटों सहित ज्वालाओं की बौछार की है। सौर ज्वालाओं को उनकी शक्ति के आधार पर A, B, C, M और X श्रेणियों में विभाजित किया जाता है, जिसमें M-श्रेणी सबसे शक्तिशाली X-श्रेणी के ठीक नीचे आती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस प्रकार की सौर गतिविधियाँ केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा का विषय नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा प्रभाव हमारे वैश्विक संचार तंत्र पर पड़ता है। इस विस्फोट ने पृथ्वी के सूर्य की ओर वाले हिस्से में एक मध्यम (R2) रेडियो ब्लैकआउट पैदा किया, जिससे अफ्रीका, यूरोप और आर्कटिक के कुछ हिस्सों में उच्च-आवृत्ति रेडियो संचार प्रभावित हुआ है।
सौर ज्वालाओं की तीव्रता और उनके बाद आने वाले CME का समय पृथ्वी के सुरक्षा कवच यानी मैग्नेटोस्फीयर के लिए एक बड़ी चुनौती और अवसर दोनों है।
अब वैज्ञानिकों की नजरें इस CME पर टिकी हैं। प्रारंभिक मॉडलों के अनुसार, पृथ्वी को शुक्रवार, 28 अगस्त को इस CME का हल्का प्रभाव महसूस हो सकता है। अरोरा विशेषज्ञ जुरे अतानाकव के अनुसार, NASA का मॉडल भविष्यवाणी करता है कि CME सुबह 6-7 बजे (EDT) के आसपास पृथ्वी तक पहुंच सकता है। हालांकि यह एक 'ग्लांसिंग ब्लो' (हल्का प्रहार) हो सकता है, लेकिन इसके साथ एक और महत्वपूर्ण कारक जुड़ रहा है।
Solar Influences Data Analysis Center (SIDC) के अनुसार, एक उच्च-गति सौर हवा का प्रवाह 27 अगस्त से पृथ्वी को प्रभावित करना शुरू करेगा। यदि यह सौर हवा और CME का प्रभाव एक साथ मिलता है, तो यह भू-चुंबकीय गतिविधि को बढ़ा सकता है, जिससे उत्तरी रोशनी (Aurora Borealis) दिखने की संभावना काफी प्रबल हो जाती है।
तुलना: सौर ज्वाला श्रेणियाँ
| श्रेणी | शक्ति का स्तर | प्रभाव |
|---|---|---|
| X-Class | अत्यधिक शक्तिशाली | वैश्विक रेडियो ब्लैकआउट, लंबे समय तक प्रभाव |
| M-Class | मध्यम से शक्तिशाली | क्षेत्रीय रेडियो ब्लैकआउट, अरोरा की संभावना |
| C-Class | कम शक्तिशाली | नगण्य प्रभाव |
CME का अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि जब यह पृथ्वी तक पहुंचेगा, तब इसका चुंबकीय क्षेत्र किस दिशा में होगा। यदि इसका चुंबकीय क्षेत्र दक्षिण की ओर झुका हुआ है, तो यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ अधिक प्रभावी ढंग से क्रिया करेगा, जिससे अरोरा की चमक बढ़ सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. सौर ज्वालाएं हमारे संचार को कैसे प्रभावित करती हैं?
ये रेडियो तरंगों में व्यवधान पैदा कर सकती हैं, जिससे GPS और उच्च-आवृत्ति संचार बाधित हो सकता है।
2. क्या अरोरा हर जगह दिखाई देगा?
नहीं, अरोरा आमतौर पर ध्रुवीय क्षेत्रों (आर्कटिक और अंटार्कटिक) के पास ही सबसे स्पष्ट दिखाई देता है।