पुणे के एक दंपति ने 'Ismclimatech' के माध्यम से मल्टी-लेयर्ड प्लास्टिक (MLP) कचरे को औद्योगिक ग्रेड के दानों (pellets) में बदलने की तकनीक विकसित की है। यह नवाचार लैंडफिल में जाने वाले प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में क्रांतिकारी साबित हो सकता है।

  • मल्टी-लेयर्ड प्लास्टिक (MLP) को बिना गर्मी के एल्युमीनियम से अलग करने की नई तकनीक विकसित की गई।
  • इस तकनीक से निकलने वाले दानों का उपयोग फुटवियर और ऑटोमोटिव सेक्टर में किया जा सकता है।
  • भारत सालाना लगभग 3.8 मिलियन टन MLP कचरा पैदा करता है।

पुणे के नेशनल केमिकल्स लेबोरेटरी में हाल ही में एक स्टार्टअप शोकेस के दौरान कुछ ऐसी चीजें दिखाई गईं जो पहली नज़र में असंबद्ध लग सकती हैं। एक तरफ दवाइयों और खाद्य पदार्थों के चमकदार रैपर थे, तो दूसरी तरफ जूते के तलवे। आश्चर्य की बात यह है कि ये दोनों ही वस्तुएं मल्टी-लेयर्ड प्लास्टिक (MLP) से बनी थीं।

मुंबई विश्वविद्यालय से पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी में पीएचडी प्राप्त दीपाली जादिया और हर्ष जादिया ने इस असंभव लगने वाले कार्य को संभव कर दिखाया है। अपने स्टार्टअप 'Ismclimatech' के माध्यम से, इस दंपति ने MLP को औद्योगिक ग्रेड के प्लास्टिक पेलेट्स (pellets) में बदलने का एक अनूठा तरीका खोज निकाला है।

तकनीकी नवाचार और प्रक्रिया

Ismclimatech की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वे बिना किसी अत्यधिक गर्मी का उपयोग किए MLP से एल्युमीनियम निकाल सकते हैं। इसके बाद बचे हुए मिश्रित प्लास्टिक को बिना किसी गंध या दरार के टिकाऊ दानों (pellets) के रूप में ढाला जा सकता है। ये पेलेट्स वर्जिन PVC और PP-PE रेजिन के एक सीधे और पुनर्चक्रण योग्य विकल्प के रूप में काम करते हैं।

हमने एक जैव-रासायनिक अपसाइकिलिंग प्रक्रिया विकसित की है जो कुख्यात रूप से गैर-पुनर्चक्रण योग्य MLP को उच्च मूल्य वाले प्लास्टिक पेलेट्स में बदल देती है।

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह तकनीक भारत के कचरा प्रबंधन संकट के लिए एक गेम-चेंजर हो सकती है। भारत में खाद्य, पेय और सौंदर्य प्रसाधन उद्योग प्रतिदिन लगभग 50 टन MLP कचरा उत्पन्न करते हैं। वर्तमान में, अधिकांश कचरे को या तो लैंडफिल में फेंक दिया जाता है या सीमेंट भट्टियों में जला दिया जाता है, जिससे गंभीर वायु प्रदूषण होता है।

Why This Matters

यह नवाचार न केवल पर्यावरण को बचाता है बल्कि एक नई 'ग्रीन इकोनॉमी' को भी जन्म देता है। दीपाली जादिया का मानना है कि यह तकनीक कचरा संग्रहण को प्रोत्साहित करेगी और स्थानीय कचरा बीनने वालों के लिए आजीविका के बेहतर अवसर पैदा करेगी। वर्तमान में, कंपनी फुटवियर सेक्टर पर ध्यान केंद्रित कर रही है, लेकिन भविष्य में ऑटोमोटिव क्षेत्र में भी इसके विस्तार की योजना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मल्टी-लेयर्ड प्लास्टिक (MLP) का उपयोग 20वीं सदी के उत्तरार्ध में पैकेजिंग की मजबूती बढ़ाने के लिए शुरू हुआ था। हालांकि, इसकी विभिन्न परतों (प्लास्टिक और एल्युमीनियम) को अलग करना पारंपरिक पुनर्चक्रण विधियों के लिए लगभग असंभव रहा है, जिससे यह दुनिया के सबसे खतरनाक कचरे में से एक बन गया है।

Did You Know?: भारत में सालाना लगभग 38 लाख टन मल्टी-लेयर्ड प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जो रीसाइक्लिंग की दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण है।

Frequently Asked Questions

1. MLP क्या है और यह खतरनाक क्यों है?
MLP का अर्थ मल्टी-लेयर्ड प्लास्टिक है। इसमें प्लास्टिक और एल्युमीनियम की परतें जुड़ी होती हैं, जिन्हें अलग करना कठिन होता है, जिससे यह लैंडफिल में वर्षों तक बना रहता है।

2. Ismclimatech के पेलेट्स का उपयोग कहाँ हो सकता है?
इनका उपयोग फुटवियर के तलवे, ऑटोमोटिव पार्ट्स और अन्य औद्योगिक प्लास्टिक उत्पादों में किया जा सकता है।