इसरो के INSAT-3DS उपग्रह ने मध्य भारत के ऊपर एक सक्रिय कम दबाव वाले क्षेत्र (Low-Pressure System) का पता लगाया है, जो भारी बारिश का कारण बन रहा है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 10 सितंबर के बाद मानसून कमजोर हो सकता है।
- इसरो के INSAT-3DS उपग्रह ने मध्य और पूर्वी भारत में भारी बादलों का निर्माण देखा है।
- झारखंड से मध्य प्रदेश की ओर बढ़ता कम दबाव का क्षेत्र भारी बारिश ला सकता है।
- 10 सितंबर के बाद मानसून के कमजोर होने और उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी की संभावना है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नवीनतम INSAT-3DS मौसम उपग्रह के आंकड़ों से पता चला है कि भारत के मानसून बेल्ट में गतिविधि अभी भी काफी तीव्र है। मध्य भारत के ऊपर एक सक्रिय कम दबाव वाला क्षेत्र (Low-Pressure System) बन रहा है, जो व्यापक बादल निर्माण और भारी वर्षा को प्रेरित कर रहा है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के विश्लेषण के अनुसार, पश्चिम झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में बना यह कम दबाव का क्षेत्र अब उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश की ओर खिसक गया है। यह प्रणाली समुद्र तल से लगभग 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैली हुई है और इसमें चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) देखा गया है। अगले 24 घंटों में इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने की संभावना है, जिससे मध्य और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश बढ़ सकती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस प्रकार के मौसमी बदलाव न केवल कृषि चक्र को प्रभावित करते हैं, बल्कि जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। मध्य भारत में सक्रिय यह प्रणाली नमी को देश के भीतरी इलाकों में खींच रही है, जो गरज के साथ भारी बौछारें पैदा करने के लिए एक 'इंजन' के रूप में कार्य करती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रणाली मानसून के अंतिम चरणों में नमी बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन जेट स्ट्रीम के बदलाव से स्थिति बदल सकती है।
हालांकि, लंबी अवधि का पूर्वानुमान कुछ अलग संकेत दे रहा है। मौसम मॉडल बताते हैं कि 10 सितंबर के बाद ऊपरी स्तर की 'जेट स्ट्रीम' दक्षिण की ओर खिसक सकती है। इससे उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में शुष्क हवाओं का प्रवेश होगा, जिससे मानसून की ताकत कम हो जाएगी और उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
ऐतिहासिक संदर्भ
भारत में मानसून का पैटर्न ऐतिहासिक रूप से जेट स्ट्रीम और हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) द्वारा नियंत्रित होता रहा है। सितंबर का महीना आमतौर पर मानसून की विदाई का समय होता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसके पैटर्न में काफी बदलाव देखे गए हैं।
Frequently Asked Questions
1. क्या दिल्ली-NCR में भारी बारिश होगी?
दिल्ली-NCR में व्यापक बारिश की संभावना कम है, लेकिन नोएडा और गाजियाबाद जैसे इलाकों में दोपहर के बाद गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
2. मानसून कब वापस लौटेगा?
पूर्वानुमान के अनुसार, सितंबर के मध्य तक उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी शुरू हो सकती है।