IISc बेंगलुरु और TCG-CREST के शोधकर्ताओं ने कीमोथेरेपी के दौरान होने वाले अत्यधिक ठंड के दर्द (कोल्ड एलोडिनिया) के पीछे के न्यूरल सर्किट की पहचान की है। यह खोज कैंसर रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।
- वैज्ञानिकों ने कीमोथेरेपी के कारण होने वाले 'कोल्ड एलोडिनिया' (ठंड से होने वाला दर्द) के पीछे के मस्तिष्क सर्किट की पहचान की है।
- यह दर्द मुख्य रूप से प्लैटिनम-आधारित दवाओं जैसे ऑक्सीप्लेटिन (Oxaliplatin) के कारण होता है।
- शोध में पाया गया कि मस्तिष्क के 'पैराब्रैचियल न्यूक्लियस' और 'थैलेमस' के बीच का संबंध बदल जाता है।
- यह खोज भविष्य में दर्द निवारक दवाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और कोलकाता के TCG-CREST के शोधकर्ताओं ने एक क्रांतिकारी खोज की है। उन्होंने उस विशिष्ट 'ब्रेन सर्किट' की पहचान की है जो कीमोथेरेपी के एक गंभीर दुष्प्रभाव, जिसे 'कोल्ड एलोडिनिया' (Cold Allodynia) कहा जाता है, को संचालित करता है। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'सेल रिपोर्ट्स' (Cell Reports) में प्रकाशित हुआ है।
कोल्ड एलोडिनिया क्या है?
कोल्ड एलोडिनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें रोगी को सामान्य तापमान या हल्की ठंड से भी अत्यधिक दर्द और बेचैनी महसूस होती है। यह 'कीमोथेरेपी-प्रेरित पेरिफेरल न्यूरोपैथी' का एक हिस्सा है। विशेष रूप से, ऑक्सीप्लेटिन (Oxaliplatin) जैसी प्लैटिनम-आधारित दवाओं का उपयोग करने वाले कैंसर रोगियों में यह समस्या बहुत आम है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कीमोथेरेपी के दौरान होने वाला यह दर्द केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी थका देने वाला होता है। अक्सर उपचार समाप्त होने के बाद तंत्रिका कोशिकाएं ठीक हो जाती हैं, लेकिन मस्तिष्क में होने वाले ये बदलाव स्थायी दर्द का कारण बन सकते हैं। इस सर्किट की पहचान होने से अब वैज्ञानिक इस दर्द को लक्षित करने वाली नई दवाओं पर काम कर सकेंगे।
कीमोथेरेपी के बाद तंत्रिका अंत (nerve endings) ठीक हो सकते हैं, लेकिन मस्तिष्क में होने वाले परिवर्तन ही इस पुराने दर्द का असली कारण बनते हैं।
शोध के सह-लेखक और IISc के प्रोफेसर अरब बारिक ने बताया कि उन्होंने पाया कि कीमोथेरेपी के संपर्क में आने के बाद चूहों के मस्तिष्क में एक विशिष्ट सर्किट बदल जाता है। उन्होंने विशेष रूप से लेटरल पैराब्रैचियल न्यूक्लियस (Lateral Parabrachial Nucleus) और थैलेमस के पैराफैसिकुलर क्षेत्र (Parafascicular Region) के बीच के संबंध में बदलाव देखा।
ऐतिहासिक संदर्भ और वैज्ञानिक विकास
दशकों से, डॉक्टर जानते थे कि कीमोथेरेपी के रोगियों को ठंड से असहनीय दर्द होता है, लेकिन इसका सटीक न्यूरोलॉजिकल कारण अज्ञात था। पहले इसे केवल नसों की क्षति माना जाता था, लेकिन इस नए शोध ने साबित कर दिया है कि समस्या केवल नसों में नहीं, बल्कि मस्तिष्क के सूचना प्रसंस्करण (information processing) के तरीके में है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह खोज मनुष्यों के लिए भी लागू होती है?
उत्तर: वर्तमान शोध चूहों पर किया गया है, लेकिन वैज्ञानिक अब ऐसी दवाओं पर काम कर रहे हैं जो इस सर्किट को नियंत्रित कर सकें, जिससे भविष्य में मनुष्यों के लिए इलाज संभव हो सके।
प्रश्न 2: क्या यह दर्द हमेशा के लिए बना रहता है?
उत्तर: हाँ, यदि मस्तिष्क के सर्किट में परिवर्तन स्थायी हो जाते हैं, तो यह क्रोनिक दर्द का कारण बन सकता है।