लखनऊ के सिद्धार्थ कुमार निषाद और सूक्ष्म जीवविज्ञानी तेजस ने 'मातृयारी टेक' के माध्यम से शैवाल (Algae) आधारित एयर प्यूरीफायर पेश किया है, जो कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर ऑक्सीजन पैदा करने में सक्षम है।

  • मातृयारी टेक ने दिल्ली के आनंद विहार में शैवाल-आधारित एयर प्यूरीफायर का प्रोटोटाइप पेश किया।
  • यह तकनीक PM 2.5 कणों को कम करने के साथ-साथ ऑक्सीजन का उत्पादन करती है।
  • प्रौद्योगिकी का लक्ष्य कार्बन डाइऑक्साइड को सोखना और प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से ऑक्सीजन छोड़ना है।

दिल्ली की गंभीर वायु गुणवत्ता समस्या से निपटने के लिए एक अभिनव समाधान सामने आया है। लखनऊ के सिद्धार्थ कुमार निषाद और बीड़ के औद्योगिक सूक्ष्म जीवविज्ञानी तेजस द्वारा स्थापित स्टार्टअप, Matriyari Technology Private Limited, ने एक प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण किया है। यह तकनीक पारंपरिक एयर प्यूरीफायर से अलग है क्योंकि यह केवल हवा को छानती नहीं है, बल्कि सक्रिय रूप से हवा की गुणवत्ता में सुधार करती है।

वर्तमान में आनंद विहार ISBT टर्मिनल पर कार्यरत यह उपकरण शैवाल (Algae) आधारित तकनीक का उपयोग करता है। सिद्धार्थ कुमार निषाद के अनुसार, हवा में ऑक्सीजन की कमी से मस्तिष्क की थकान और एकाग्रता में कमी आती है। उनका यह नया रिएक्टर एक विशेष शैवाल मिश्रण और पंप प्रणाली का उपयोग करता है, जो हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करता है और प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया के माध्यम से ताजी ऑक्सीजन छोड़ता है।

तकनीकी कार्यप्रणाली

यह प्रणाली एक उन्नत रिएक्टर के रूप में कार्य करती है जिसमें पानी में शैवाल का एक विशिष्ट मिश्रण होता है। जैसे ही प्रदूषित हवा इस प्रणाली से गुजरती है, पंप सिस्टम सूक्ष्म कणों (PM 2.5) को अलग करने में मदद करता है, जबकि शैवाल गैसों के साथ प्रतिक्रिया करके कार्बन सोख लेते हैं। यह प्रक्रिया न केवल प्रदूषकों को हटाती है, बल्कि वातावरण में ऑक्सीजन के स्तर को भी बढ़ाती है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण अब केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक आर्थिक और संज्ञानात्मक चुनौती बन गई है। पारंपरिक फिल्टर केवल धूल के कणों को रोकते हैं, लेकिन वे गैसों के स्तर को नहीं बदल सकते। मातृयारी टेक की यह 'क्लाइमेट टेक्नोलॉजी' वायु शुद्धिकरण के क्षेत्र में एक प्रतिमान बदलाव (Paradigm Shift) ला सकती है क्योंकि यह प्रदूषण को हटाने के साथ-साथ ऑक्सीजन उत्पादन को भी जोड़ती है।

प्रदूषण से निपटने के लिए केवल फिल्टर करना पर्याप्त नहीं है; हमें ऐसी तकनीक चाहिए जो प्रकृति की तरह कार्बन को सोखकर ऑक्सीजन पुनर्जीवित कर सके।

लागत के दृष्टिकोण से, टीम ने बताया है कि इस उपकरण के निर्माण की लागत लगभग 50,000 से 1 लाख रुपये के बीच होगी। हालांकि, रसद और वितरण के आधार पर इसकी अनुमानित बिक्री कीमत 1.5 लाख से 3 लाख रुपये के बीच हो सकती है। वर्तमान में इस स्टार्टअप की टीम में आठ से नौ मुख्य सदस्य शामिल हैं।

Did You Know?: शैवाल (Algae) पृथ्वी पर कुल ऑक्सीजन उत्पादन का एक बहुत बड़ा हिस्सा बनाने के लिए जिम्मेदार हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: यह प्यूरीफायर सामान्य प्यूरीफायर से कैसे अलग है?
उत्तर: सामान्य प्यूरीफायर केवल कणों को छानते हैं, जबकि यह शैवाल तकनीक CO2 सोखकर ऑक्सीजन पैदा करती है।

प्रश्न 2: क्या यह तकनीक बड़े पैमाने पर उपलब्ध होगी?
उत्तर: स्टार्टअप वर्तमान में प्रोटोटाइप चरण में है और व्यावसायिक उत्पादन की योजना बना रहा है।