प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक अनिल काकोडकर ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए थोरियम-आधारित ईंधन की ओर संक्रमण करने का आह्वान किया है। उन्होंने बताया कि कैसे यह कदम यूरेनियम की कमी को दूर कर सकता है।
- अनिल काकोडकर ने मौजूदा PHWR रिएक्टरों में थोरियम के उपयोग का प्रस्ताव दिया है।
- भारत के पास थोरियम का विशाल भंडार है, जो ऊर्जा आत्मनिर्भरता की कुंजी है।
- वैश्विक स्तर पर यूरेनियम की आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
- थोरियम का उपयोग करने से यूरेनियम की खपत कम हो सकती है।
भारत के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक अनिल काकोडकर ने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव का सुझाव दिया है। 6वें अंतर्राष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान, उन्होंने तर्क दिया कि भारत को अपने स्वदेशी प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) बेड़े में थोरियम-आधारित ईंधन को शामिल करना चाहिए। यह कदम न केवल भारत के विशाल थोरियम भंडार का लाभ उठाएगा, बल्कि परमाणु ईंधन के क्षेत्र में देश को पूरी तरह से आत्मनिर्भर भी बनाएगा।
वर्तमान में, भारत एक तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम का पालन कर रहा है। पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग होता है, दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) होते हैं, और तीसरे चरण में थोरियम का उपयोग करके यूरेनियम-233 का उत्पादन किया जाता है। काकोडकर का कहना है कि चूंकि PHWR की क्षमता अब 50-60 गीगावाट तक पहुंच रही है, इसलिए थोरियम को इस प्रक्रिया में जल्दी शामिल करने का एक सुनहरा अवसर है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जैसे-जैसे दुनिया भर के देश अपनी परमाणु क्षमता बढ़ा रहे हैं, यूरेनियम की वैश्विक आपूर्ति पर भारी दबाव पड़ने वाला है। यदि भारत समय रहते थोरियम की ओर नहीं बढ़ता, तो भविष्य में ऊर्जा संकट और ईंधन की बढ़ती लागत एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
यूरेनियम की आपूर्ति पर दबाव बढ़ने वाला है, इसलिए यूरेनियम से थोरियम की ओर संक्रमण हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
काकोडकर ने लागत संबंधी चिंताओं को भी संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि थोरियम एक मजबूत न्यूट्रॉन अवशोषक है, लेकिन 'हाई बर्न-अप' ईंधन का उपयोग करके बिजली की लागत को स्थिर रखा जा सकता है और यूरेनियम की खपत को कम किया जा सकता है। यह एक 'विन-विन' स्थिति होगी जहाँ मौजूदा रिएक्टरों का उपयोग अधिक कुशलता से किया जा सकेगा।
भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम
| चरण | मुख्य ईंधन | तकनीक/लक्ष्य |
|---|---|---|
| चरण 1 | प्राकृतिक यूरेनियम | PHWR (प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर) |
| चरण 2 | प्लूटोनियम + depeleted यूरेनियम | FBR (फास्ट ब्रीडर रिएक्टर) |
| चरण 3 | थोरियम (Th-232) | U-233 आधारित उन्नत रिएक्टर |
हाल ही में, कलपक्कम में भारत के पहले स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने 'क्रिटिकलिटी' प्राप्त की है, जो दूसरे चरण की ओर एक मील का पत्थर है। यह प्रगति थोरियम के बड़े पैमाने पर उपयोग की नींव रख रही है।
Frequently Asked Questions
1. थोरियम यूरेनियम से बेहतर क्यों माना जाता है?
भारत के संदर्भ में, थोरियम का भंडार यूरेनियम की तुलना में कहीं अधिक प्रचुर मात्रा में है, जो दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करता है।
2. क्या थोरियम का उपयोग करने से बिजली महंगी होगी?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उच्च बर्न-अप ईंधन का उपयोग किया जाए, तो यूरेनियम की बचत के कारण लागत संतुलित रह सकती है।