वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन के अनुसार, मंगल ग्रह के विशाल घाटी तंत्र वैलेस मैरिनेरिस में आई एक प्राचीन बाढ़ ने ग्रह के संभावित समुद्र के स्तर को 34 मीटर तक बढ़ा दिया था। इस भीषण जलप्रलय ने खरबों क्यूबिक मीटर पानी छोड़ा था, जो सौर मंडल की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक हो सकती है।
- वैलेस मैरिनेरिस घाटी में हुई प्राचीन बाढ़ ने मंगल के समुद्र स्तर को 34 मीटर बढ़ाया।
- इस बाढ़ में लगभग 1,245 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर पानी का प्रवाह हुआ था।
- यह अध्ययन केरल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सज्जित कुमार और अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है।
मंगल ग्रह के इतिहास में एक अत्यंत विनाशकारी और विशाल जलप्रलय की संभावना का पता चला है। वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में खुलासा किया है कि वैलेस मैरिनेरिस (Valles Marineris), जो सौर मंडल की सबसे बड़ी घाटी प्रणाली है, में हुई एक प्राचीन बाढ़ ने मंगल के काल्पनिक प्राचीन समुद्र के वैश्विक औसत स्तर को लगभग 34 मीटर तक बढ़ा दिया था। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Icarus में प्रकाशित हुआ है।
विशाल जलप्रलय का स्वरूप
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इस महाप्रलय के दौरान लगभग 1,245 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर पानी का विसर्जन हुआ था। वैलेस मैरिनेरिस प्रणाली, जो मंगल के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में 4,000 किलोमीटर से अधिक फैली हुई है, कभी विशाल जलाशयों और झीलों से भरी हुई थी। सिमुलेशन से पता चलता है कि इन जलाशयों में कुल 2,369 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर पानी था, जिसका लगभग आधा हिस्सा इस विनाशकारी घटना के दौरान अचानक निकल गया था।
यह घटना मंगल के 'लेट हेस्परियन' से 'अर्ली अमेज़ोनियन' काल के दौरान हुई थी। मुख्य रूप से यह दरार Eos Chasma नामक स्थान पर हुई, जहाँ से पानी का बहाव Chryse Planitia के माध्यम से उत्तरी मैदानी इलाकों और Oceanus Borealis नामक प्राचीन समुद्र की ओर बढ़ा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की भूगर्भीय घटनाएं न केवल ग्रह के भूगोल को बदल देती हैं, बल्कि जीवन की संभावनाओं को भी प्रभावित करती हैं। यदि इतनी बड़ी बाढ़ पृथ्वी पर आती, तो यह लगभग 3.6 मिलियन वर्ग किलोमीटर भूमि को जलमग्न कर देती, जिससे महाद्वीपों का स्वरूप बदल जाता।
यदि पृथ्वी पर इतनी बड़ी बाढ़ आती, तो रहने योग्य भूमि और उपजाऊ डेल्टा का विनाश होता और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता।
इस शोध में केरल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर सज्जित कुमार ने भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST), जापान के ओकायामा विश्वविद्यालय और अमेरिका के मिशिगन स्टेट विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने इस घटना के पुनर्निर्माण के लिए द्वि-आयामी हाइड्रोलिक मॉडलिंग का उपयोग किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मंगल ग्रह का इतिहास पानी की उपस्थिति और उसके अचानक सूखने की कहानियों से भरा है। वैलेस मैरिनेरिस जैसी संरचनाएं यह संकेत देती हैं कि मंगल कभी बहुत अधिक गतिशील और गीला ग्रह था, जहाँ टेक्टोनिक और ज्वालामुखीय गतिविधियों ने पानी के विशाल भंडारों को जन्म दिया था।
Frequently Asked Questions
1. वैलेस मैरिनेरिस क्या है?
यह सौर मंडल की सबसे बड़ी घाटी प्रणाली है जो मंगल ग्रह के भूमध्य रेखा पर स्थित है।
2. इस बाढ़ का प्रभाव क्या था?
इसने मंगल के प्राचीन समुद्र के स्तर को 34 मीटर तक बढ़ा दिया और स्थानीय स्तर पर पानी का स्तर 324 मीटर तक बढ़ा दिया था।