आंध्र प्रदेश ट्रांसको (AP-Transco) ने बिजली के बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग करने हेतु निविदाएं आमंत्रित की हैं। यह पायलट प्रोजेक्ट एआई (AI) की मदद से ट्रांसमिशन लाइनों की स्थिति का सटीक आकलन करेगा।
- AP-Transco ने DGCA-अनुपालक ड्रोन सेवा प्रदाताओं से निविदाएं मांगी हैं।
- पायलट प्रोजेक्ट के तहत 23,000 टावरों और 8,500 किमी लंबी हाई-वोल्टेज लाइनों की निगरानी की जाएगी।
- ड्रोन द्वारा ली गई तस्वीरों का विश्लेषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से किया जाएगा।
आंध्र प्रदेश विद्युत पारेषण निगम (AP-Transco) ने अपने बिजली पारेषण बुनियादी ढांचे के प्रबंधन में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए ड्रोन तकनीक के उपयोग की घोषणा की है। निगम ने हाल ही में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के मानकों का पालन करने वाले ड्रोन सेवा प्रदाताओं से निविदाएं आमंत्रित की हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पायलट आधार पर निवारक रखरखाव (Preventive Maintenance) को अधिक कुशल और सटीक बनाना है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरुआती चरण में, सफल बोलीदाता लगभग 23,000 टावरों और 8,500 किलोमीटर लंबी 400 kV, 220 kV और 132 kV की एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (EHV) लाइनों की निगरानी करेंगे। यह परियोजना दो साल की अवधि के लिए संचालित की जाएगी। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो इस तकनीक को ट्रांसको की कुल 33,000 किलोमीटर लंबी लाइनों तक विस्तारित किया जा सकता है।
तकनीकी नवाचार और AI का मेल
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ड्रोन द्वारा कैप्चर किए गए उच्च-रिज़ॉल्यूशन फोटो, वीडियो और थर्मल इमेज का विश्लेषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य उन्नत उपकरणों की मदद से किया जाएगा। इससे बिजली के टावरों, बोल्ट्स, इंसुलेटर और अन्य महत्वपूर्ण घटकों में आने वाली सूक्ष्म तकनीकी खामियों को भी पहचाना जा सकेगा, जो अक्सर मानवीय निरीक्षण के दौरान छूट जाती हैं।
ड्रोन तकनीक और एआई का एकीकरण बिजली ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने और रखरखाव लागत को कम करने में गेम-चेंजर साबित होगा।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि ग्रिड की स्थिरता को भी बढ़ाएगा। पारंपरिक मानवीय निरीक्षण की तुलना में ड्रोन कई बार चक्कर (sorties) बहुत कम समय में लगा सकते हैं, जिससे परिचालन लागत में भारी कमी आने की संभावना है।
ऐतिहासिक संदर्भ और तुलना
AP-Transco ने इस तकनीक को अपनाने के लिए पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (PGCIL) के सफल मॉडल से प्रेरणा ली है। PGCIL पहले से ही मल्टी-सेंसर पेलोड से लैस ड्रोन का उपयोग करके अपनी संपत्तियों का आकलन कर रहा है।
| विशेषता | मानवीय निरीक्षण | ड्रोन आधारित निरीक्षण |
|---|---|---|
| समय की खपत | अधिक (धीमी प्रक्रिया) | बहुत कम (तेज प्रक्रिया) |
| सटीकता | मध्यम (मानवीय त्रुटि संभव) | उच्च (AI और थर्मल इमेजिंग) |
| सुरक्षा जोखिम | उच्च (ऊंचाई पर काम करना) | न्यूनतम (रिमोट ऑपरेशन) |
निगम वर्तमान में लागत को कम करने के लिए इन AI उपकरणों को इन-हाउस (स्वयं के स्तर पर) विकसित करने पर भी काम कर रहा है, ताकि भविष्य में यह तकनीक पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन सके।
Frequently Asked Questions
1. इस परियोजना का मुख्य लाभ क्या है?
इसका मुख्य लाभ बिजली लाइनों के रखरखाव में लगने वाले समय और लागत को कम करना तथा ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाना है।
2. क्या यह तकनीक सभी लाइनों पर लागू होगी?
फिलहाल यह एक पायलट प्रोजेक्ट है, लेकिन सफल होने पर इसे 33,000 किमी लंबी लाइनों तक बढ़ाया जाएगा।