केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग (KSERC) ने KSEB को दिन के बजाय रात में जलविद्युत उत्पादन करने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया है ताकि शाम के समय होने वाली बिजली की कमी को दूर किया जा सके।

  • KSERC ने KSEB को जलविद्युत उत्पादन के समय में बदलाव का सुझाव दिया है।
  • दिन के समय सौर ऊर्जा की अधिकता के कारण बिजली का अधिशेष रहता है।
  • शाम 6 बजे के बाद होने वाली बिजली की कमी को दूर करने का लक्ष्य है।
  • महंगे बाहरी बिजली खरीद को कम करके उपभोक्ताओं के बिलों पर बोझ घटाने की कोशिश।

तिरुवनंतपुरम: केरल में शाम के समय बिजली की बढ़ती मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन को देखते हुए, केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग (KSERC) ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। आयोग ने केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) को निर्देश दिया है कि वह इस बात की गहन जांच करे कि क्या दिन के समय होने वाले जलविद्युत (Hydropower) उत्पादन को रात के समय स्थानांतरित किया जा सकता है।

आयोग के अध्यक्ष टी.के. जोस ने गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान यह सुझाव दिया। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य को शाम के घंटों में बिजली की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में, केरल में दिन के समय सौर ऊर्जा की क्षमता में जबरदस्त वृद्धि हुई है, जिसके कारण ग्रिड में बिजली का अधिशेष (Surplus) बना रहता है। इस अधिशेष को समायोजित करने के लिए, KSEB को पहले से अनुबंध की गई बिजली को छोड़ना पड़ता है, जो आर्थिक रूप से नुकसानदेह है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि केरल की वर्तमान ऊर्जा समस्या 'समय का अंतर' (Time mismatch) है। दिन में जब सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती है, तब मांग कम होती है, लेकिन शाम 6 बजे के बाद जब मांग चरम पर होती है, तब राज्य को बाहर से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती है। यदि जलविद्युत को रात में स्थानांतरित किया जाता है, तो यह सौर ऊर्जा के खाली समय का लाभ उठाएगा और शाम के संकट को कम करेगा।

जलविद्युत उत्पादन का समय बदलना केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है।

आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच KSEB ने बिजली की खरीद पर लगभग ₹1,190 करोड़ खर्च किए हैं। आयोग का मानना है कि यदि रात में उत्पादन बढ़ाया जाता है, तो राज्य को बाहरी स्रोतों से महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता कम होगी, जिससे अंततः उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में लगने वाले सरचार्ज (Surcharge) में कमी आएगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

केरल पहले भी ऊर्जा संकटों से जूझ चुका है। 2026 की गर्मियों और दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान, बिजली की कमी के कारण KSEB को सीमित स्तर पर बिजली कटौती (Power curbs) भी लागू करनी पड़ी थी। सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग ने ग्रिड प्रबंधन की नई चुनौतियां पेश की हैं, जिससे 'राउंड-द-क्लॉक' (RTC) बिजली प्रबंधन की आवश्यकता बढ़ गई है।

Did You Know?: सौर ऊर्जा का उत्पादन केवल दिन में होता है, जिससे रात के समय ऊर्जा भंडारण और वैकल्पिक उत्पादन स्रोतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

Frequently Asked Questions

1. KSERC ने यह सुझाव क्यों दिया है?
ताकि शाम के समय होने वाली बिजली की कमी को दूर किया जा सके और बाहर से महंगी बिजली खरीदने के खर्च को बचाया जा सके।

2. सौर ऊर्जा का इस पर क्या प्रभाव है?
दिन में सौर ऊर्जा की अधिकता के कारण ग्रिड में बिजली ज्यादा रहती है, जिससे जलविद्युत का उपयोग करने के बजाय उसे छोड़ना पड़ता है।