ITRI के संस्थापक मिरिक गोगरी ने बताया कि कैसे 'वैली ऑफ डेथ' को पार करने के लिए अनुवादात्मक अनुसंधान (Translational Research) अनिवार्य है। उन्होंने प्रयोगशाला से बाजार तक के सफर में प्रोटोटाइपिंग की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
- अनुवादात्मक अनुसंधान प्रयोगशाला के निष्कर्षों को वास्तविक दुनिया के उत्पादों में बदलता है।
- 'वैली ऑफ डेथ' वह चरण है जहाँ जोखिम और लागत दोनों बहुत अधिक होते हैं।
- ITRI का लक्ष्य स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
भारत में वैज्ञानिक नवाचार और उनके व्यावसायिक उपयोग के बीच एक बड़ी खाई मौजूद है। ट्रांसलेशनल रिसर्च इनिशिएटिव (ITRI) के संस्थापक मिरिक गोगरी के अनुसार, इस खाई को पाटने के लिए अनुवादात्मक अनुसंधान (Translational Research) सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यह प्रक्रिया केवल प्रयोगशाला में शोध करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध के परिणामों को उपयोगी तकनीक और उत्पादों में बदलने की एक जटिल यात्रा है।
वैली ऑफ डेथ: नवाचार का सबसे कठिन दौर
मिरिक गोगरी ने एक महत्वपूर्ण अवधारणा को रेखांकित किया जिसे 'वैली ऑफ डेथ' (Valley of Death) कहा जाता है। उन्होंने समझाया कि प्रयोगशाला स्तर पर शोध करते समय जोखिम बहुत अधिक होता है लेकिन लागत कम होती है। इसके विपरीत, व्यावसायिक स्तर पर पहुँचने पर जोखिम कम हो जाता है लेकिन लागत अत्यधिक बढ़ जाती है। समस्या उस मध्यवर्ती चरण में आती है जहाँ जोखिम और लागत दोनों ही बहुत ऊंचे होते हैं। इसी चरण में कई स्टार्टअप और शोध परियोजनाएं बिना पर्याप्त समर्थन के दम तोड़ देती हैं।
अनुवादात्मक अनुसंधान का अर्थ है विचार का सत्यापन करना, प्रोटोटाइप विकसित करना और तकनीक को बड़े पैमाने पर परीक्षण के लिए तैयार करना।
गोगरी के अनुसार, प्रयोगशाला में केवल कुछ ग्राम रसायन बनाना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक सफलता तब मिलती है जब हम 100-500 किलोग्राम के स्तर पर उत्पादन (Piloting) करके देख सकें कि क्या वह तकनीक बड़े पैमाने पर काम करेगी। यही वह अंतर है जो अकादमिक संस्थानों द्वारा प्रदान किए गए बौद्धिक संपदा (IP) और उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के बीच बना रहता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की आर्थिक प्रगति के लिए केवल शोध करना काफी नहीं है, बल्कि उस शोध को बाजार तक ले जाना आवश्यक है। यदि भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनना है, तो हमें TRL 4 से TRL 7 के बीच के अंतराल को भरना होगा, जहाँ प्रोटोटाइपिंग और पायलट टेस्टिंग की आवश्यकता होती है।
ITRI के मुख्य फोकस क्षेत्र
ITRI केवल एक विशिष्ट उत्पाद बनाने पर केंद्रित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना चाहता है जो विभिन्न उद्योगों के लिए उपयोगी हो। इसके प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं:
- स्वास्थ्य सेवा और बायोलॉजिक्स: बीमारियों के बेहतर निदान और उपचार के लिए।
- ऊर्जा और जलवायु: टिकाऊ समाधानों और स्वच्छ ऊर्जा के लिए।
- उन्नत विनिर्माण: एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए जटिल घटकों का उत्पादन।
| विशेषता | प्रयोगशाला स्तर (Lab Level) | व्यावसायिक स्तर (Commercial Level) |
|---|---|---|
| जोखिम (Risk) | अत्यधिक उच्च | कम |
| लागत (Cost) | कम | अत्यधिक उच्च |
| उत्पादन मात्रा | ग्राम में | किलोग्राम/टन में |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'वैली ऑफ डेथ' क्या है?
उत्तर: यह अनुसंधान के उस चरण को संदर्भित करता है जहाँ प्रोटोटाइपिंग और पायलट परीक्षण के लिए धन और संसाधनों की कमी के कारण नवाचार विफल हो जाते हैं।
प्रश्न 2: ITRI का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: ITRI का उद्देश्य भारत में एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो अनुसंधान को प्रोटोटाइप और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों में बदलने में मदद करे।