आईआईटी दिल्ली के प्रतिष्ठित प्रोफेसर और प्रसिद्ध जलवायु वैज्ञानिक कृष्ण अचुतराव का 62 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने जलवायु जोखिम मूल्यांकन और चरम मौसम की घटनाओं के अध्ययन में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
- आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर और प्रमुख जलवायु वैज्ञानिक कृष्ण अचुतराव का निधन।
- चरम मौसम की घटनाओं में मानवीय प्रभाव के अध्ययन के विशेषज्ञ।
- वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन और IPCC के साथ महत्वपूर्ण जुड़ाव।
- आईआईटी दिल्ली में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्लाइमेट चेंज अडैप्टेशन' की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका।
भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक काला दिन है। आईआईटी दिल्ली के सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंसेज में प्रोफेसर और प्रमुख जलवायु वैज्ञानिक कृष्ण अचुतराव का शुक्रवार को 62 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
अचुतराव केवल एक वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के सामाजिक प्रभावों के एक प्रबल वक्ता भी थे। उनका मुख्य शोध कार्य 'क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट' (जलवायु जोखिम मूल्यांकन) और 'एट्रिब्यूशन साइंस' (श्रेय विज्ञान) पर केंद्रित था। इस विज्ञान के माध्यम से यह मापा जाता है कि मानवीय गतिविधियों ने किसी विशेष चरम मौसम की घटना (जैसे बाढ़ या लू) में कितनी भूमिका निभाई है।
वैश्विक योगदान और वैज्ञानिक विरासत
अचुतराव का नाम वैश्विक स्तर पर World Weather Attribution नेटवर्क के साथ गहराई से जुड़ा हुआ था, जो दुनिया भर में होने वाली चरम मौसम की घटनाओं का विश्लेषण करता है। इसके अलावा, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समर्थित IPCC (Intergovernmental Panel on Climate Change) के कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो वैश्विक जलवायु आकलन के लिए जिम्मेदार है।
उन्होंने विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले और कमजोर समुदायों को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने के लिए काम किया। आईआईटी दिल्ली में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्लाइमेट चेंज अडैप्टेशन' की स्थापना में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
कृष्ण अचुतराव का वैज्ञानिक स्वभाव, बारीकियों पर उनका ध्यान और उनका अद्भुत सेंस ऑफ ह्यूमर उन्हें एक अद्वितीय सहकर्मी बनाता था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, अचुतराव का निधन भारत के जलवायु अनुसंधान क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने न केवल जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाने की कला में महारत हासिल की थी, बल्कि देश में 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' (पूर्व चेतावनी प्रणाली) को मजबूत करने के लिए भी निरंतर जोर दिया था।
उनके परिवार में उनकी पत्नी मिला मित्रा हैं, जो एक प्रसिद्ध खगोल भौतिक विज्ञानी (Astrophysicist) हैं और नासा के साथ काम कर चुकी हैं। वे 'STEM & Space' की सह-संस्थापक भी हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जलवायु परिवर्तन का अध्ययन पिछले कुछ दशकों में भारत के लिए एक प्राथमिकता बन गया है। अचुतराव जैसे वैज्ञानिकों ने यह सुनिश्चित करने में मदद की कि भारत न केवल वैश्विक डेटा का हिस्सा बने, बल्कि अपने स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र और समुदायों की सुरक्षा के लिए ठोस वैज्ञानिक आधार तैयार करे।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कृष्ण अचुतराव का मुख्य शोध क्षेत्र क्या था?
उत्तर: उनका मुख्य शोध जलवायु जोखिम मूल्यांकन और चरम मौसम की घटनाओं में मानवीय योगदान के अध्ययन पर केंद्रित था।
प्रश्न 2: उन्होंने आईआईटी दिल्ली में क्या विशेष योगदान दिया?
उत्तर: उन्होंने आईआईटी दिल्ली में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर क्लाइमेट चेंज अडैप्टेशन' की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।