भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के FSID ने एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया है, जिसके तहत 2030 तक 1,000 औद्योगिक परियोजनाओं को पूरा करने और 300 डीप-टेक स्टार्टअप्स का पोर्टफोलियो बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

  • 2030 तक 1,000 औद्योगिक परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य।
  • 300 डीप-टेक स्टार्टअप्स के पोर्टफोलियो का निर्माण।
  • संस्था के नेतृत्व में पहली बार एक उद्योग विशेषज्ञ (CEO) की नियुक्ति।
  • विज्ञान, उद्योग और उद्यमिता के बीच सेतु बनाने के लिए नया गवर्नेंस मॉडल।

बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के फाउंडेशन फॉर साइंस, इनोवेशन एंड डेवलपमेंट (FSID) ने सोमवार को एक नई और व्यापक रणनीति का अनावरण किया। FSID, जो IISc की डीप साइंस और डीप-टेक क्षमताओं के लिए एक 'सिंगल-विंडो इंटरफेस' के रूप में कार्य करता है, ने घोषणा की है कि वह वर्ष 2030 तक भारत के तकनीकी परिदृश्य को बदलने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश और नवाचार को बढ़ावा देगा।

इस नई पहल के तहत, FSID न केवल 1,000 उद्योग-केंद्रित परियोजनाओं को संचालित करेगा, बल्कि 300 अत्याधुनिक डीप-टेक स्टार्टअप्स को भी विकसित करेगा। संस्था का उद्देश्य एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनना है जो विज्ञान और उद्यमिता के बीच की दूरी को कम करे और भारतीय नवाचारों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए।

नया नेतृत्व और गवर्नेंस मॉडल

FSID ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव करते हुए एक नया गवर्नेंस मॉडल पेश किया है। संस्था के नए CEO ओमप्रकाश सुब्बाराओ ने कहा कि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी अनुवाद की दुनिया तेजी से बदल रही है, और उद्योग तथा सरकार की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि FSID को अधिक फुर्तीला और पेशेवर बनाने के लिए पहली बार एक उद्योग जगत के नेता को CEO नियुक्त किया गया है।

"हमारा लक्ष्य बहुराष्ट्रीय निगमों, भारतीय कंपनियों और MSMEs के साथ जुड़ाव को गहरा करना है ताकि विज्ञान का वास्तविक दुनिया में प्रभाव दिखे।"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम भारत को केवल एक 'सेवा केंद्र' (Service Hub) से बदलकर एक 'उत्पाद नवाचार केंद्र' (Product Innovation Hub) बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। डीप-टेक स्टार्टअप्स पर ध्यान केंद्रित करने का मतलब है कि भारत अब AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और बायोटेक जैसे जटिल क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, जो दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य है।

संस्था के संचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए, प्रोफेसर सूर्यार्थी बोस प्रोफेसर-इन-चार्ज के रूप में कार्य करेंगे, जो FSID और IISc के बीच एक मुख्य कड़ी के रूप में संस्थागत निरीक्षण प्रदान करेंगे। यह संरचना सुनिश्चित करती है कि शैक्षणिक उत्कृष्टता और व्यावसायिक व्यवहार्यता के बीच संतुलन बना रहे।

क्या आप जानते हैं?: डीप-टेक स्टार्टअप्स वे होते हैं जो महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोजों या इंजीनियरिंग नवाचारों पर आधारित होते हैं, न कि केवल मौजूदा तकनीक के नए उपयोग पर।

रणनीतिक बदलाव: पुराना बनाम नया मॉडल

विशेषतापिछला दृष्टिकोणनया विजन (2030)
नेतृत्वमुख्यतः शैक्षणिकउद्योग-नेतृत्व (Industry-led CEO)
लक्ष्यसीमित प्रोजेक्ट्स1,000 उद्योग प्रोजेक्ट्स + 300 स्टार्टअप्स
पहुंचसंस्थान केंद्रितवैश्विक और डोमेन-अज्ञेयवादी (Domain-agnostic)

Frequently Asked Questions

1. FSID का मुख्य उद्देश्य क्या है?
FSID का मुख्य उद्देश्य IISc की वैज्ञानिक क्षमताओं को उद्योगों के साथ जोड़ना और डीप-टेक स्टार्टअप्स के माध्यम से नवाचार को व्यावसायिक उत्पादों में बदलना है।

2. इस योजना में MSMEs की क्या भूमिका है?
FSID सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के साथ साझेदारी करके उन्हें उच्च-स्तरीय अनुसंधान और तकनीकी समाधान प्रदान करना चाहता है।