बेंगलुरु स्थित डीप-टेक कंपनी एस्ट्रोगेट लैब्स 2027 तक भारत का पहला स्वदेशी ऑप्टिकल इंटर-सैटेलाइट लिंक (OISL) लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। यह तकनीक उपग्रहों के बीच उच्च गति वाले लेजर संचार को सक्षम बनाएगी।
- एस्ट्रोगेट लैब्स 2027 तक भारत का पहला स्वदेशी OISL टर्मिनल लॉन्च करने का लक्ष्य रख रही है।
- कंपनी ने बेंगलुरु स्पेस एक्सपो 2026 में 10 Gbps क्षमता वाला 'एस्ट्रोलिंक माइक्रो' प्रदर्शित किया।
- एस्ट्रोगेट लैब्स इसरो (ISRO) को सैटेलाइट-टू-ग्राउंड लेजर टर्मिनल की आपूर्ति करने वाली एकमात्र भारतीय कंपनी है।
बेंगलुरु, भारत: अंतरिक्ष संचार के क्षेत्र में भारत ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। बेंगलुरु स्थित डीप-टेक स्टार्टअप एस्ट्रोगेट लैब्स (Astrogate Labs) ने घोषणा की है कि वह भारत का पहला स्वदेशी ऑप्टिकल इंटर-सैटेलाइट लिंक (OISL) टर्मिनल विकसित कर रहा है, जिसे 2027 तक अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।
बेंगलुरु स्पेस एक्सपो 2026 के दौरान, कंपनी ने अपने 10 Gbps क्षमता वाले लेजर संचार टर्मिनल, एस्ट्रोलिंक माइक्रो (AstroLink Micro) का लाइव प्रदर्शन किया। यह तकनीक उपग्रहों के बीच डेटा ट्रांसफर के लिए पारंपरिक रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) के बजाय अत्यधिक सटीक लेजर बीम का उपयोग करती है, जो कहीं अधिक सुरक्षित और तेज है।
तकनीकी महत्व और भविष्य की राह
वर्तमान में, उपग्रहों के बीच संचार के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है, जो बैंडविड्थ की कमी और हस्तक्षेप (interference) जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि एस्ट्रोगेट की OISL तकनीक इस समस्या का समाधान करेगी, जिससे भविष्य के लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) उपग्रह समूहों (constellations) के लिए एक मजबूत कनेक्टिविटी लेयर तैयार होगी।
"कुछ समय पहले तक भारत में लेजर संचार केवल एक शोध का विषय था, लेकिन आज यह एक उत्पाद है जिसे हम इसरो जैसे ग्राहकों को दे रहे हैं," - नीतीश के. सिंह, संस्थापक और सीईओ, एस्ट्रोगेट लैब्स।
एस्ट्रोगेट लैब्स पहले ही इसरो (ISRO) को स्वदेशी सैटेलाइट-टू-ग्राउंड लेजर संचार टर्मिनल की आपूर्ति कर चुकी है, जो इसे इस रणनीतिक तकनीक के मामले में देश की अग्रणी कंपनी बनाता है। कंपनी के तकनीक स्तर (TRL) ने 8 तक की सफलता प्राप्त कर ली है, जिसका अर्थ है कि यह उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार है।
रणनीतिक और रक्षा अनुप्रयोग
यह तकनीक न केवल वाणिज्यिक उपग्रहों के लिए, बल्कि संप्रभु रक्षा उपग्रहों (Sovereign Defence Constellations) और कक्षीय कंप्यूटिंग के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उपग्रहों को पृथ्वी पर डेटा भेजने से पहले एक-दूसरे के साथ सीधे संचार करने की अनुमति देती है, जिससे लेटेंसी (देरी) कम होती है और डेटा सुरक्षा बढ़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. OISL तकनीक क्या है?
यह उपग्रहों के बीच डेटा भेजने के लिए लेजर बीम का उपयोग करने वाली तकनीक है, जो रेडियो तरंगों की तुलना में बहुत तेज है।
2. एस्ट्रोगेट लैब्स की सफलता का प्रमाण क्या है?
कंपनी ने इसरो को पहले ही सफल लेजर संचार टर्मिनल की आपूर्ति की है और इसका परीक्षण पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय के साथ भी किया गया है।