वैज्ञानिक नाबा कुमार मंडल ने बताया कि कैसे बंद परमाणु ईंधन चक्र भारत को उसके विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करने और रेडियोधर्मी कचरे को कम करने में मदद कर सकता है।
- बंद परमाणु ईंधन चक्र थोरियम आधारित ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण है।
- भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम थोरियम के उपयोग पर केंद्रित है।
- फास्ट ब्रीडर रिएक्टर थोरियम को यूरेनियम-233 में बदलने में मदद करते हैं।
- यह तकनीक रेडियोधर्मी कचरे के प्रबंधन में भी सुधार करेगी।
विशाखापत्तनम में आयोजित एक व्याख्यान के दौरान, प्रख्यात कण भौतिक विज्ञानी नाबा कुमार मंडल ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'बंद परमाणु ईंधन चक्र' (Closed Nuclear Fuel Cycle) न केवल भारत के पास मौजूद प्रचुर मात्रा में थोरियम संसाधनों का दोहन करने में सक्षम बनाएगा, बल्कि दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए आवश्यक रेडियोधर्मी कचरे की मात्रा को भी काफी हद तक कम कर देगा।
साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स, कोलकाता के वरिष्ठ वैज्ञानिक मंडल ने GITAM विश्वविद्यालय में 'यूरेनियम से थोरियम तक: भारत की ऊर्जा सुरक्षा का मार्ग' विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने भारत के महत्वाकांक्षी तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम की व्याख्या करते हुए बताया कि कैसे यह कार्यक्रम देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहा है।
भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम
मंडल के अनुसार, भारत का परमाणु रोडमैप तीन मुख्य चरणों में विभाजित है:
1. पहले चरण में यूरेनियम का उपयोग।
2. दूसरे चरण में प्लूटोनियम-आधारित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का उपयोग।
3. तीसरे चरण में थोरियम-आधारित यूरेनियम-233 (U-233) ईंधन का उपयोग।
उन्होंने उल्लेख किया कि प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) का क्रिटिकैलिटी प्राप्त करना दूसरे चरण की ओर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों को अतिरिक्त विखंडनीय सामग्री (fissile material) उत्पन्न करने और थोरियम को उपयोगी U-233 में बदलने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है, लेकिन इसे बिजली में बदलने के लिए उन्नत पुनर्चक्रण तकनीक की आवश्यकता है। यदि भारत सफलतापूर्वक बंद ईंधन चक्र को लागू करता है, तो यह न केवल ऊर्जा संकट को हल करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर परमाणु कचरे के प्रबंधन के लिए एक मॉडल भी पेश करेगा।
बंद परमाणु ईंधन चक्र थोरियम को एक व्यावहारिक ऊर्जा स्रोत में बदलने की कुंजी है।
इसके अतिरिक्त, मंडल ने उन्नत रिएक्टर अवधारणाओं जैसे मोल्टन साल्ट रिएक्टरों की क्षमता पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि उच्च-तापमान रिएक्टर न केवल बिजली उत्पादन कर सकते हैं, बल्कि कम-कार्बन वाले हाइड्रोजन उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जो भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।
Frequently Asked Questions
1. थोरियम यूरेनियम से बेहतर क्यों माना जाता है?
थोरियम प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है और इसे यूरेनियम की तुलना में अधिक सुरक्षित और कुशल तरीके से ऊर्जा में बदला जा सकता है यदि सही तकनीक का उपयोग हो।
2. फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्या करते हैं?
ये रिएक्टर उपयोग किए गए ईंधन से अधिक ईंधन पैदा करते हैं, जिससे थोरियम को यूरेनियम-233 में बदलना संभव होता है।