भारतीय रेलवे ने दुर्घटनाओं को कम करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का व्यापक जाल बिछाया है। इस पहल के तहत पहियों की खराबी से लेकर जंगली हाथियों के बचाव तक के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

  • AI-आधारित प्रणालियों के कारण गंभीर रेल दुर्घटनाओं में 2014-15 (135) से 2025-26 (11) तक भारी गिरावट आई है।
  • 'कवच' (Kavach) सिस्टम को SIL-4 अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानक प्राप्त हुआ है।
  • हाथियों की मृत्यु रोकने के लिए डिस्ट्रीब्यूटेड एकोस्टिक सेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
  • 1,731 स्टेशनों पर AI-संचालित वीडियो निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है।

भारतीय रेलवे के अनुसंधान, डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) ने सुरक्षा और दक्षता के नए युग की शुरुआत की है। हैदराबाद में आयोजित AI टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन कॉन्फ्रेंस में आरडीएसओ के डिप्टी डायरेक्टर जनरल काजी मैराज अहमद ने खुलासा किया कि रेलवे अब केवल पारंपरिक प्रणालियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनी रीढ़ बना रहा है।

रेलवे द्वारा लागू की गई इंटीग्रेटेड ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) कंप्यूटर विज़न का उपयोग करके पटरियों, स्लीपर्स और फास्टनिंग्स का बारीकी से निरीक्षण करती है। इसके अलावा, व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर्स (WILD) जैसी प्रणालियाँ ट्रेनों के चलने के दौरान ही पहियों में होने वाली सूक्ष्म खामियों को पकड़ लेती हैं, जिससे संभावित पटरी से उतरने (derailment) की घटनाओं को रोका जा सकता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the integration of AI in Indian Railways is not just a technical upgrade but a humanitarian necessity. By shifting from reactive maintenance to predictive AI-driven monitoring, the railways are drastically reducing human error. The move to prioritize 'lives saved' over 'digital metrics' marks a paradigm shift in how government infrastructure projects are measured.

वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए, रेलवे ने हाथियों की मृत्यु को रोकने के लिए AI-आधारित घुसपैठ पहचान प्रणाली तैनात की है। यह तकनीक विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के घने जंगलों में प्रभावी है, जहाँ 141 किलोमीटर के ट्रैक पर इसे पहले ही लागू किया जा चुका है और 1,000 किलोमीटर के लिए निविदाएं जारी की गई हैं।

"सरकारी AI के लिए पैमाना लाइक्स या क्लिक्स नहीं, बल्कि बचाई गई जान है।" - काजी मैराज अहमद, RDSO.

कोहरे और कम दृश्यता की समस्या से निपटने के लिए 'त्रि-नेत्र' (Tri-Nethra) नामक एक उन्नत ड्राइवर सहायता प्रणाली विकसित की जा रही है। यह प्रणाली विशेष रूप से पूर्वोत्तर के कठिन इलाकों में लोको पायलटों को सुरक्षित नेविगेशन में मदद करेगी।

भारत की अपनी स्वदेशी तकनीक 'कवच' (Kavach) ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। यह ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम वर्तमान में 2,746 रूट किलोमीटर पर सक्रिय है और 860 स्टेशनों को कवर करता है। जनवरी में ही 'कवच 4.0' के 472 रूट किलोमीटर कमीशन करना एक रिकॉर्ड उपलब्धि है।

विशेषता पारंपरिक प्रणाली AI-संचालित प्रणाली (नया)
निरीक्षण मैनुअल/शारीरिक जांच कंप्यूटर विज़न और ITMS
दुर्घटना दर उच्च (2014-15 में 135) अत्यंत कम (2025-26 में 11)
वन्यजीव सुरक्षा ड्राइवर की सतर्कता पर निर्भर AI-आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम
क्या आप जानते हैं?: 'कवच' सिस्टम को SIL-4 रेटिंग प्राप्त है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेलवे सुरक्षा का सर्वोच्च मानक माना जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: 'त्रि-नेत्र' प्रणाली का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य कोहरे और कम दृश्यता वाली स्थितियों में लोको पायलटों को सुरक्षित रूप से ट्रेन चलाने में मदद करना है।

प्रश्न 2: AI ने रेल दुर्घटनाओं को कम करने में कितनी मदद की है?
उत्तर: consequential दुर्घटनाओं की संख्या 2014-15 के 135 से घटकर 2025-26 में केवल 11 रह गई है।