लेखिका सुक्निध कौर ने 'पितृसत्तात्मक टेक्नो-कैपिटलिज्म' और AI के खतरनाक संगम की जांच की है, और सवाल उठाया है कि कैसे डिजिटल विजिबिलिटी और डीपफेक स्त्रीत्व की परिभाषा बदल रहे हैं।
- 'पितृसत्तात्मक टेक्नो-कैपिटलिज्म' का उदय कॉर्पोरेट लाभ के लिए महिलाओं की छवियों का वस्तुकरण करता है।
- जेनरेटिव AI और डीपफेक को सहमति की कमी के कारण केवल पोर्नोग्राफी नहीं, बल्कि 'यौन शोषण सामग्री' माना जाना चाहिए।
- AI साथी वास्तविक दुनिया के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकते हैं क्योंकि वे बिना किसी स्वतंत्र जरूरत के केवल इच्छाओं को पूरा करते हैं।
इंडिया टुडे के कार्यक्रम 'Booked' के नवीनतम संस्करण में, अनीशा माथुर ने लेखिका सुक्निध कौर से उनकी नई पुस्तक 'Your Perfect Dream Girl: Influencers, AI, and the Future of Desire' पर विस्तृत चर्चा की। यह पुस्तक इस बात का गहन विश्लेषण करती है कि कैसे तकनीक, लिंग, पूंजीवाद और मानवीय व्यवहार एक-दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं।
कौर का तर्क है कि इंटरनेट ने उन समस्याओं को हल करने के बजाय बढ़ा दिया है जिनका सामना महिलाएं पीढ़ियों से कर रही हैं। उनके अनुसार, इंटरनेट पर किसी महिला के लिए 'दृश्य' (visible) होने का कोई सुरक्षित तरीका नहीं है, क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म संरचनात्मक रूप से महिलाओं को उनकी छवियों और उनसे जुड़ी कहानियों पर पूर्ण नियंत्रण देने के लिए नहीं बनाए गए हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि AI-जनित इन्फ्लुएंसर्स और साथियों की ओर झुकाव केवल एक तकनीकी चलन नहीं है, बल्कि एक समाजशास्त्रीय बदलाव है। जब इच्छाओं को सहमति और एजेंसी से अलग कर दिया जाता है, तो मानवीय अंतरंगता की नींव खतरे में पड़ जाती है।
चर्चा का एक सबसे विचलित करने वाला हिस्सा जेनरेटिव AI के माध्यम से बनाए गए यौन स्पष्ट डीपफेक थे। कौर का कहना है कि ऐसी सामग्री को 'डीपफेक पोर्नोग्राफी' कहना गलत है; इसके बजाय इसे 'डीपफेक यौन शोषण सामग्री' (deepfake sexual abuse material) कहा जाना चाहिए, क्योंकि इसमें सहमति का पूरी तरह अभाव होता है।
"तकनीक कानूनों और सुरक्षा तंत्रों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ रही है, और कंपनियां 'प्रॉफिट बाय डिजाइन' पर काम करती हैं, जहाँ सुरक्षा को अक्सर उत्पाद बनने के बाद जोड़ा जाता है।"
कौर की चिंता केवल स्पष्ट छवियों तक सीमित नहीं है। वह सवाल उठाती हैं कि जब AI साथी उपयोगकर्ताओं को ऐसे पार्टनर बनाने की अनुमति देंगे जो बिना किसी स्वतंत्र आवश्यकता या उम्मीद के केवल उनकी इच्छाओं को पूरा करें, तो वास्तविक जीवन के रिश्तों का क्या होगा? क्या हम उन महिलाओं के प्रति अपनी संवेदनशीलता खो देंगे जिनकी अपनी जरूरतें और इच्छाएं होती हैं?
पुस्तक इस धारणा को भी चुनौती देती है कि इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर अधिक दृश्यता का अर्थ अनिवार्य रूप से 'सशक्तिकरण' है। हालांकि इंटरनेट ने आर्थिक अवसर दिए हैं, लेकिन यह स्वतंत्रता अभी भी एल्गोरिदम और विज्ञापनदाताओं द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 'पितृसत्तात्मक टेक्नो-कैपिटलिज्म' क्या है?
यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें व्यवसाय ऐसी तकनीकें बनाते हैं जो महिलाओं के उपभोग और उनके वस्तुकरण से लाभ कमाती हैं, जिससे डिजिटल माध्यम से पुरानी पितृसत्तात्मक संरचनाएं मजबूत होती हैं।
प्रश्न 2: कौर डीपफेक पोर्नोग्राफी और शोषण सामग्री के बीच अंतर क्यों करती हैं?
क्योंकि 'पोर्नोग्राफी' में अक्सर सहमति देने वाले वयस्क शामिल होते हैं, जबकि डीपफेक में किसी व्यक्ति की पहचान चुराकर उसकी सहमति के बिना यौन सामग्री बनाई जाती है।