PwC इंडिया और साइबर-फिजिकल सिस्टम (CPS) सुरक्षा विशेषज्ञ क्लैरॉटी ने एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इस गठबंधन का उद्देश्य भारत के औद्योगिक प्रणालियों, स्वास्थ्य सेवा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बढ़ते साइबर खतरों से बचाना है।
- PwC इंडिया और क्लैरॉटी ने साइबर-फिजिकल सिस्टम (CPS) की सुरक्षा के लिए हाथ मिलाया है।
- यह साझेदारी आईटी (IT) और ओटी (OT) वातावरण के बीच बढ़ते जोखिमों को कम करने पर केंद्रित है।
- इसका मुख्य लक्ष्य विनिर्माण, ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में परिचालन लचीलापन बढ़ाना है।
मुंबई, महाराष्ट्र - वैश्विक परामर्श दिग्गज PwC इंडिया ने साइबर-फिजिकल सिस्टम (CPS) सुरक्षा में अग्रणी कंपनी क्लैरॉटी (Claroty) के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक गठबंधन की घोषणा की है। यह साझेदारी आधुनिक व्यवसायों की उन जटिल साइबर सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए की गई है, जो डिजिटल परिवर्तन के कारण तेजी से उभर रही हैं। जैसे-जैसे कंपनियां ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी (OT) और औद्योगिक प्रणालियों को क्लाउड और इंटरनेट से जोड़ रही हैं, साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
यह गठबंधन क्लैरॉटी की एआई-संचालित (AI-powered) सुरक्षा क्षमताओं और PwC इंडिया की जोखिम प्रबंधन और व्यावसायिक परिवर्तन की गहरी विशेषज्ञता को एक साथ लाता है। इसका उद्देश्य संगठनों को उनके कनेक्टेड एसेट्स (Connected Assets) पर बेहतर दृश्यता प्रदान करना और एक एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से साइबर जोखिमों का प्रबंधन करना है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत जैसे तेजी से बढ़ते विनिर्माण केंद्र के लिए यह साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब आईटी और ओटी का मिलन होता है, तो पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियाँ विफल हो सकती हैं। यह गठबंधन केवल सॉफ्टवेयर प्रदान करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत के 'मिशन-क्रिटिकल' इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित करने की एक व्यापक रणनीति है, जो अंततः वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगी।
"जैसे-जैसे संगठन अधिक जुड़े और डिजिटल होते जा रहे हैं, विश्वास और लचीलापन व्यावसायिक विकास के अभिन्न अंग बन रहे हैं।" - सुंदरेश्वर कृष्णमूर्ति, पार्टनर और इंडिया साइबर लीडर, PwC इंडिया।
विनिर्माण, ऊर्जा, उपयोगिताओं और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में डिजिटल परिवर्तन ने साइबर अपराधियों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। औद्योगिक नियंत्रण प्रणाली (ICS) और IoT उपकरणों पर होने वाले हमले न केवल वित्तीय नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि वे भौतिक सुरक्षा और जन-जीवन के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं।
अमनजीत makesh, PwC इंडिया के ओटी साइबर सुरक्षा पार्टनर ने जोर देकर कहा कि आज के ग्राहक केवल 'पॉइंट सॉल्यूशंस' नहीं चाहते, बल्कि उन्हें ऐसे भागीदारों की तलाश है जो औद्योगिक संचालन की जटिलता और साइबर जोखिम की तात्कालिकता, दोनों को समझते हों। क्लैरॉटी की दृश्यता और PwC की सलाहकार क्षमताएं मिलकर एक अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार करती हैं।
| विशेषता | पारंपरिक आईटी सुरक्षा | ओटी/सीपीएस सुरक्षा (PwC + Claroty) |
|---|---|---|
| मुख्य लक्ष्य | डेटा गोपनीयता और सुरक्षा | परिचालन निरंतरता और भौतिक सुरक्षा |
| प्रभाव | डेटा चोरी या सिस्टम डाउनटाइम | उत्पादन रुकना या भौतिक दुर्घटनाएं |
| दृष्टिकोण | फायरवॉल और एंटी-वायरस | एसेट इन्वेंट्री और रियल-टाइम थ्रेट डिटेक्शन |
Frequently Asked Questions
1. ओटी (OT) सुरक्षा क्या है और यह आईटी सुरक्षा से कैसे अलग है?
आईटी सुरक्षा डिजिटल डेटा की रक्षा करती है, जबकि ओटी सुरक्षा उन हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की रक्षा करती है जो भौतिक उपकरणों (जैसे मशीनों और सेंसर) को नियंत्रित करते हैं।
2. इस साझेदारी से भारतीय उद्योगों को क्या लाभ होगा?
इससे उद्योगों को अपने बुनियादी ढांचे की बेहतर दृश्यता मिलेगी, साइबर हमलों का तेजी से पता चलेगा और परिचालन में आने वाले व्यवधानों में कमी आएगी।