नए शोध से पता चला है कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम नशे जैसी लत पैदा करते हैं और युवा लड़कों को 'मैनोस्फीयर' जैसी स्त्री-द्वेषी सामग्री की ओर धकेलते हैं, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने इसे रोकने के लिए नया कानून बनाया है।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'इंटरमिटेंट रिवॉर्ड्स' का उपयोग करते हैं जिससे मस्तिष्क में डोपामाइन रिलीज होता है, जो नशे के समान है।
- एल्गोरिदम अक्सर अधिक मुनाफे के लिए उकसाने वाली और चरमपंथी सामग्री को प्राथमिकता देते हैं।
- ऑस्ट्रेलिया ने मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उपयोगकर्ताओं को एल्गोरिदम से 'ऑप्ट-आउट' (बाहर निकलने) का विकल्प देने वाला कानून पेश किया है।
- शिक्षकों के सर्वेक्षण के अनुसार, स्कूलों में 'मैनोस्फीयर' प्रभाव के कारण स्त्री-द्वेष (misogyny) में वृद्धि हुई है।
सोशल मीडिया एल्गोरिदम अब केवल सामग्री दिखाने के उपकरण नहीं रहे, बल्कि व्यवहार बदलने वाली शक्तिशाली मशीनें बन गए हैं। टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म एक 'सीक्रेट सॉस' (गुप्त कोडिंग) का उपयोग करते हैं, जो उपयोगकर्ता की ब्राउज़िंग आदतों, स्थान और व्यक्तिगत डेटा का विश्लेषण कर यह अनुमान लगाता है कि आप किस चीज़ पर प्रतिक्रिया देंगे।
मैक्वेरी यूनिवर्सिटी के संज्ञानात्मक तंत्रिका विज्ञान के प्रोफेसर मार्क विलियम्स का तर्क है कि ये प्लेटफॉर्म जानबूझकर 'एडिक्टिव' बनाए गए हैं। कभी न खत्म होने वाले फीड और समय-संवेदनशील नोटिफिकेशन के माध्यम से, टेक दिग्गज एक ऐसा चक्र बनाते हैं जिसमें उपयोगकर्ता घंटों समय बिता देता है। यह डिजाइन नींद, मानसिक स्वास्थ्य और वास्तविक दुनिया के रिश्तों की कीमत पर बनाया गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल समय की बर्बादी नहीं है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक खतरा है। एल्गोरिदम उपयोगकर्ताओं को 'रैबिट होल' (गहरे गड्ढे) में धकेलते हैं, जहाँ उत्तेजक सामग्री को अधिक बढ़ावा मिलता है क्योंकि आक्रोश (outrage) से जुड़ाव (engagement) बढ़ता है और जुड़ाव से मुनाफा।
एल्गोरिदम के अनिश्चित पुरस्कार मस्तिष्क के डोपामाइन सिस्टम को सक्रिय करते हैं, जिससे पदार्थ की लत (substance addiction) जैसा अनिवार्य चक्र बन जाता है।
इसका सबसे खतरनाक प्रभाव किशोर लड़कों पर देखा जा रहा है, जिन्हें फिटनेस और खेल की सामान्य पोस्ट से शुरू कर धीरे-धीरे 'मैनोस्फीयर' की ओर ले जाया जाता है। यह एक ऐसा समुदाय है जो महिलाओं के प्रति नफरत और हिंसा को बढ़ावा देता है। ऑस्ट्रेलिया के 2,600 से अधिक शिक्षकों के सर्वेक्षण में पाया गया कि 70% ने छात्रों के व्यवहार में इस नकारात्मक प्रभाव को देखा है।
इस स्थिति से निपटने के लिए, ऑस्ट्रेलिया एक नया कानून लागू कर रहा है जिसके तहत उपयोगकर्ताओं को एल्गोरिदम से 'ऑप्ट-आउट' करने का विकल्प मिलेगा। "माय फीड, माय वे" पहल का उद्देश्य सोशल मीडिया को उसके मूल स्वरूप में लाना है, जहाँ केवल दोस्तों और परिवार के अपडेट दिखें, न कि AI द्वारा चुनी गई सामग्री।
हालांकि, चुनौती यह है कि क्या लोग वास्तव में इस विकल्प को चुनेंगे। 2025 के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि केवल 20% लोग ही व्यक्तिगत सिफारिशों को बंद करना चाहते थे। यह दर्शाता है कि एल्गोरिदम ने लोगों को मानसिक रूप से इतना नियंत्रित कर लिया है कि उन्हें साधारण फीड अब 'उबाऊ' लग सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: 'मैनोस्फीयर' क्या है?
उत्तर: यह ऑनलाइन समुदायों और प्रभावशाली व्यक्तियों का एक समूह है जो अति-पुरुषत्व और महिलाओं के प्रति शत्रुतापूर्ण दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं।
प्रश्न: ऑस्ट्रेलिया का 'ऑप्ट-आउट' कानून कैसे काम करता है?
उत्तर: यह कानून कंपनियों को बाध्य करता है कि वे उपयोगकर्ताओं को एक ऐसा स्विच दें जिससे वे AI-आधारित फीड के बजाय केवल अपने फॉलो किए गए अकाउंट्स की क्रोनोलॉजिकल फीड देख सकें।