एक महत्वाकांक्षी अंतरराष्ट्रीय परियोजना के तहत केरल के तट पर मल्टीपर्पज ऑफशोर फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म (MOFP) लगाने का प्रस्ताव है, जिससे तटीय कटाव रुकेगा और लहरों, हवा व सौर ऊर्जा का दोहन होगा।
- केरल के तट को उबड़-खाबड़ समुद्र से बचाने के लिए मल्टीपर्पज ऑफशोर फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म (MOFP) का प्रस्ताव।
- लहर ऊर्जा कन्वर्टर्स, वर्टिकल-एक्सिस विंड टर्बाइन और फ्लोटिंग सोलर पैनल का एकीकृत सिस्टम।
- लगभग 200 मेगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पन्न करने और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने की क्षमता।
- ULCCS, यूरोपीय फर्मों (नॉर्वे, फिनलैंड, इटली) और IIT मद्रास के बीच तकनीकी सहयोग।
जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते समुद्र के स्तर ने केरल के विस्तृत तटों पर जीवन को कठिन बना दिया है। इस पर्यावरणीय चुनौती को समृद्धि के अवसर में बदलने के लिए, एक बहुराष्ट्रीय consortium ने मल्टीपर्पज ऑफशोर फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म (MOFP) तैनात करने का प्रस्ताव दिया है। इस परियोजना का उद्देश्य समुद्र की विनाशकारी लहरों के प्रभाव को कम करना और साथ ही अक्षय ऊर्जा और टिकाऊ 'ब्लू इकोनॉमी' को बढ़ावा देना है।
इस पहल का नेतृत्व उरलुंगल लेबर कॉन्ट्रैक्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (ULCCS) द्वारा पौल कंसल्ट (नॉर्वे), विंडसाइड (फिनलैंड) और यूनिवर्सिटी ऑफ सालेंटो (इटली) के सहयोग से किया जा रहा है। प्रस्तावित संरचनाएं स्टील ट्यूबलर प्लेटफॉर्म हैं, जिनकी लंबाई 200 से 250 मीटर के बीच होगी। इन्हें समुद्र तल से बांधा जाएगा और तटरेखा के समानांतर लगाया जाएगा, जिससे तटीय बस्तियों और परिवहन नेटवर्क की सुरक्षा होगी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह परियोजना तटीय रक्षा के पारंपरिक तरीकों (जैसे समुद्री दीवारें) से हटकर समुद्र के सक्रिय आर्थिक उपयोग की ओर एक बड़ा कदम है। इन प्लेटफॉर्म्स के पीछे 'शांत जल क्षेत्र' (calm-water zones) बनाकर, केरल मत्स्य पालन और ऊर्जा सुरक्षा को एक साथ जोड़ सकता है। यह दृष्टिकोण कटाव के पारिस्थितिक संकट और हरित ऊर्जा की औद्योगिक आवश्यकता, दोनों का समाधान करता है।
MOFP की तकनीकी संरचना अत्यंत आधुनिक है। प्लेटफॉर्म के सामने के हिस्से में लहर ऊर्जा कन्वर्टर्स होंगे, जबकि पिछले हिस्से में वर्टिकल-एक्सिस विंड टर्बाइन और फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम लगाए जाएंगे। यह तालमेल एक विविध ऊर्जा पोर्टफोलियो सुनिश्चित करता है जो केवल एक मौसम स्थिति पर निर्भर नहीं होगा।
"यह एकीकृत फ्लोटिंग संरचना प्रभावी रूप से तटरेखा के साथ एक नया उत्पादक आर्थिक गलियारा बनाती है, जो लचीलेपन को विकास के उत्प्रेरक में बदल देती है।"
इंजीनियरिंग सटीकता सुनिश्चित करने के लिए, टीम ने IIT मद्रास का सहयोग लिया है। ओशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर विजय वर्तमान में लागत दक्षता और अनुकूलन के लिए इस अवधारणा की समीक्षा कर रहे हैं। दीर्घकालिक लक्ष्य इन मॉड्यूलर प्रणालियों को विस्तारित कर लगभग 200 मेगावाट बिजली उत्पन्न करना है, जिसका उपयोग भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
संभावनाओं के बावजूद, परियोजना को राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 'ब्लू टाइड्स' केरल-यूरोपीय संघ कॉन्क्लेव 2025 के दौरान राज्य सरकार को प्रस्ताव देने के बावजूद, अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। परिणामस्वरूप, डॉ. जयकुमार और जीजू पौलोस अब भारत सरकार से संपर्क करने की योजना बना रहे हैं ताकि केरल या किसी अन्य समुद्री राज्य में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सके।
| विशेषता | पारंपरिक समुद्री दीवारें | प्रस्तावित MOFP |
|---|---|---|
| मुख्य कार्य | केवल तटीय सुरक्षा | सुरक्षा + ऊर्जा + मत्स्य पालन |
| पर्यावरणीय प्रभाव | तलछट प्रवाह को बाधित कर सकता है | शांत जल पारिस्थितिकी तंत्र बनाता है |
| आर्थिक लाभ | केवल खर्च (रखरखाव) | राजस्व सृजन (ऊर्जा/मछली) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. ये प्लेटफॉर्म तट की रक्षा कैसे करते हैं?
ये ऑफशोर ब्रेकवाटर के रूप में कार्य करते हैं, जो लहरों के तट तक पहुँचने से पहले उनकी शक्ति को कम कर देते हैं, जिससे कटाव रुकता है।
2. इस परियोजना की ऊर्जा क्षमता क्या है?
दीर्घकालिक लक्ष्य इन मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 200 मेगावाट अक्षय बिजली उत्पन्न करना है।