विप्रो एक 'ह्यूमन-AI ऑपरेटिंग मॉडल' अपना रहा है, जिसने 20,000 कर्मचारियों के बराबर उत्पादकता दर्ज की है। कंपनी छंटनी के बजाय 1 लाख से अधिक कर्मचारियों को AI के लिए प्रशिक्षित कर रही है।

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  • विप्रो की AI पहलों ने 20,000 पूर्णकालिक कर्मचारियों के बराबर उत्पादकता प्रदान की है।
  • कंपनी छंटनी के बजाय कर्मचारियों को आंतरिक रूप से अन्य भूमिकाओं में तैनात कर रही है।
  • 1,00,000 से अधिक कर्मचारियों को उन्नत AI प्रशिक्षण और प्रमाणन दिया गया है।
  • कंपनी का ध्यान अब केवल उत्पादकता के बजाय 'आउटकम' (परिणाम) पर केंद्रित है।

भारतीय आईटी क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के संकेत देते हुए, देश की शीर्ष चार आईटी कंपनियों में से एक विप्रो (Wipro) ने अपनी परिचालन दक्षता पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव का खुलासा किया है। कंपनी की मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) संध्या अरुण ने हाल ही में बताया कि AI पहलों के कारण कंपनी की उत्पादकता में भारी वृद्धि हुई है, जो लगभग 20,000 कर्मचारियों के कार्यभार के बराबर है।

वैश्विक स्तर पर AI के कारण हो रही छंटनी के विपरीत, विप्रो एक अधिक टिकाऊ दृष्टिकोण अपना रही है। कंपनी एक "ह्यूमन-AI ऑपरेटिंग मॉडल" की ओर बढ़ रही है, जहाँ कर्मचारियों को मशीनों से बदला नहीं जा रहा है, बल्कि उन्हें कंपनी के भीतर ही अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में तैनात (Redeploy) किया जा रहा है। अब इंजीनियर केवल कोडिंग नहीं करेंगे, बल्कि AI एजेंटों के समूह का प्रबंधन करेंगे।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि विप्रो भारतीय आईटी उद्योग के लिए एक भविष्य का खाका तैयार कर रही है। छंटनी के बजाय री-स्किलिंग (पुनः कौशल विकास) पर ध्यान केंद्रित करके, विप्रो ऑटोमेशन के सामाजिक जोखिम को कम करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, असली चुनौती यह होगी कि क्या भविष्य में इतने बड़े पैमाने पर नए 'आउटकम-आधारित' रोल बनाए जा सकेंगे।

"बदलाव उत्पादकता से परिणामों (Outcomes) की ओर होना चाहिए," सीटीओ संध्या अरुण ने जोर देते हुए कहा।

इस बदलाव को सफल बनाने के लिए, विप्रो ने शिक्षा में भारी निवेश किया है। कंपनी ने अपने 2,43,000 कर्मचारियों में से 1,00,000 से अधिक को उन्नत AI प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र प्रदान किए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वर्कफोर्स उस युग में प्रासंगिक बनी रहे जहाँ बुनियादी कोडिंग और रूटीन काम अब AI द्वारा किए जा रहे हैं।

विप्रो इस दिशा में अकेली नहीं है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और इंफोसिस (Infosys) भी अपनी रणनीति बदल रहे हैं। TCS ने संकेत दिया है कि AI के बढ़ते प्रभाव के कारण पारंपरिक नियुक्तियों में कमी आ सकती है। TCS 8,900 फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियरों की टीम बना रहा है, जबकि इंफोसिस अगले कुछ वर्षों में लगभग 6,000 ऐसे इंजीनियर तैयार करने की योजना बना रहा है।

कंपनी AI रणनीति का केंद्र विशेषज्ञ इंजीनियर लक्ष्य
विप्रो ह्यूमन-AI मॉडल और पुनर्नियुक्ति विस्तार जारी (अनिर्दिष्ट)
TCS हायरिंग में कमी और क्लाइंट इंटीग्रेशन 8,900 इंजीनियर
इंफोसिस AI एडॉप्शन कंसल्टेंसी 6,000 इंजीनियर

उत्पादकता बढ़ने के बावजूद, वित्तीय विश्लेषकों ने एक महत्वपूर्ण कमी की ओर इशारा किया है। विप्रो भारत की उन शीर्ष चार आईटी फर्मों में एकमात्र कंपनी है जिसने अब तक अपने AI-जनित राजस्व (Revenue) का खुलासा नहीं किया है। Nord-IQ रिसर्च के विश्लेषक मनोज चंद्रा झा का कहना है कि विप्रो अभी AI मुद्रीकरण के 'लागत-अवशोषण चरण' में है, जहाँ खर्च अधिक है और लाभ अभी आना बाकी है।

क्या आप जानते हैं?: विप्रो उन चुनिंदा आईटी दिग्गजों में से एक है जो AI को कर्मचारियों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाने वाले एक टूल के रूप में देख रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: क्या विप्रो AI के कारण कर्मचारियों को निकाल रही है?
नहीं, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को निकालने के बजाय उन्हें कंपनी के भीतर ही अन्य भूमिकाओं में स्थानांतरित किया जा रहा है।

प्रश्न 2: कितने विप्रो कर्मचारियों को AI प्रशिक्षण दिया जा रहा है?
विप्रो ने अब तक 1,00,000 से अधिक कर्मचारियों को उन्नत AI प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान किया है।