AI कंपनी एंथ्रोपिक ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है जिसमें बताया गया है कि कैसे सरकारी समूहों और अपराधियों ने जैविक हथियार, स्वायत्त ड्रोन और मिसाइलें बनाने के लिए क्लॉड AI का इस्तेमाल करने की कोशिश की।
- राज्य-समर्थित समूहों ने चिकुनगुनिया और ऑर्थोपॉक्सवायरस जैसे वायरस पर 'गेन-ऑफ-फंक्शन' रिसर्च के लिए AI का उपयोग करने का प्रयास किया।
- रूस और यमन में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल और स्वायत्त 'कामिकाज़े' ड्रोन झुंड विकसित करने के लिए AI की मदद ली गई।
- दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच जासूसी और सामूहिक निगरानी के कई प्रयासों को विफल किया गया।
AI दिग्गज एंथ्रोपिक (Anthropic) ने एक विस्तृत सुरक्षा रिपोर्ट के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरनाक उपयोगों का खुलासा किया है। कंपनी के अनुसार, विभिन्न देशों के सरकारी समूहों, जासूसी सॉफ्टवेयर विक्रेताओं और अपराधियों ने Claude AI का उपयोग करके जैविक हथियार (Bioweapons), सामूहिक निगरानी प्रणाली और जासूसी करने की कोशिश की है।
जैविक खतरा: वायरस को घातक बनाने की साजिश
रिपोर्ट के सबसे संवेदनशील हिस्से में जैविक अनुसंधान का जिक्र है। एंथ्रोपिक ने पाया कि कुछ वैज्ञानिक, जिन्हें राज्य का समर्थन प्राप्त था, AI का उपयोग करके चिकुनगुनिया वायरस में ऐसे म्यूटेशन (परिवर्तन) करने की कोशिश कर रहे थे जिससे वह अधिक घातक हो जाए। कंपनी का मानना है कि यह शोध किसी सैन्य संस्थान के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा, ऑर्थोपॉक्सवायरस (जिससे चेचक जैसी बीमारियां होती हैं) के लिए इम्यून-इवेजन ग्रांट लिखने के प्रयास भी देखे गए।
एंथ्रोपिक ने स्पष्ट किया कि वैध वैज्ञानिक शोध और घातक हथियारों के निर्माण के बीच एक बहुत ही बारीक रेखा होती है, जिससे यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि उपयोगकर्ता का असली इरादा क्या है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, AI अब केवल टेक्स्ट लिखने का साधन नहीं रहा, बल्कि यह 'कोडिंग एजेंट' बन चुका है। जब AI मिसाइलों के मार्गदर्शन और नियंत्रण (Guidance and Control) जैसे जटिल इंजीनियरिंग कार्यों को संभाल सकता है, तो यह पारंपरिक सैन्य विशेषज्ञता की आवश्यकता को कम कर देता है, जिससे खतरनाक हथियारों का निर्माण तेज और गुप्त हो जाता है।
"खतरा अब किसी कॉमिक बुक विलेन जैसा नहीं है जो सीधे कहे कि मुझे दुनिया खत्म करनी है, बल्कि यह बहुत ही सूक्ष्म और अकादमिक तरीके से पेश किया जा रहा है।"
पारंपरिक हथियार और स्वायत्त युद्ध
जैविक हथियारों के अलावा, एंथ्रोपिक ने बताया कि यमन में एक समूह ने गाइडेड रॉकेट और 2,000 किमी से अधिक रेंज वाली हाइपरसोनिक मिसाइल के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने हेतु 'क्लॉड कोड' का उपयोग किया। वहीं, रूस में 'DronDoc' नामक प्रोजेक्ट से जुड़े एक ऑपरेटर ने स्वायत्त कामिकाज़े ड्रोन झुंड (Drone Swarm) बनाने की कोशिश की, जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के इंसानों को टारगेट कर सके।
| क्षेत्र | AI का उपयोग | हथियार/लक्ष्य |
|---|---|---|
| यमन | गाइडेंस सॉफ्टवेयर | हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल |
| रूस | स्वायत्त लॉजिक | कामिक़ाज़े ड्रोन स्वार्म |
| चीन | सैन्य-औद्योगिक | पारंपरिक हथियार |
कंपनी ने इन खातों को प्रतिबंधित कर दिया और सुरक्षा फिल्टर को और कड़ा किया है। हालांकि, यह चिंता का विषय है कि हमलावर तीसरे पक्ष के प्लेटफॉर्म का उपयोग करके AI के सुरक्षा नियंत्रणों को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: क्या इनमें से कोई भी प्रयास हथियार बनाने में सफल रहा?
यमन में रॉकेट का परीक्षण किया गया था, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार वह विफल रहा। एंथ्रोपिक का दावा है कि अधिकांश उच्च-जोखिम वाले अनुरोधों को समय रहते ब्लॉक कर दिया गया।
प्रश्न 2: किन मॉडल्स का सबसे ज्यादा दुरुपयोग हुआ?
हाइकु (Haiku), सोननेट (Sonnet) और ओपस (Opus) मॉडल्स का उपयोग किया गया, जबकि फैबल (Fable) और मिथोस (Mythos) क्लास मॉडल्स का उपयोग न के बराबर हुआ।