VIT चेन्नई बायोटेक कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि AI और जीनोमिक्स निदान में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं, लेकिन वे मानवीय नैदानिक विशेषज्ञता का स्थान नहीं ले सकते। चर्चा में डेटा गोपनीयता और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर दिया गया।
- AI को एक सहायक उपकरण होना चाहिए, न कि नैदानिक निर्णय का विकल्प।
- दुर्लभ बीमारियों के निदान के लिए जीनोमिक सीक्वेंसिंग महत्वपूर्ण है, लेकिन घरेलू क्षमता बढ़ाना आवश्यक है।
- पर्सनलाइज्ड मेडिसिन के दौर में साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।
चेन्नई के ताज कोन्नेमारा में आयोजित द हिंदू-VIT चेन्नई बायोटेक कॉन्क्लेव 2026 में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा के विकसित होते संबंधों पर गहन चर्चा की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र यह था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीनोमिक्स और टेलीमेडिसिन जैसे आधुनिक उपकरण रोगी की देखभाल के परिदृश्य को कैसे बदल रहे हैं।
नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्रोफेसर डॉ. गणपथी के. ने याद दिलाया कि स्वास्थ्य सेवा मूल रूप से विश्वास पर आधारित है। उन्होंने तर्क दिया कि हालांकि AI विशाल डेटा को प्रोसेस कर सकता है, लेकिन इसमें उस सूक्ष्म नैदानिक निर्णय (Clinical Judgment) की कमी है जो जटिल चिकित्सा निर्णयों के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि टेलीमेडिसिन का उपयोग शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के बीच की खाई को पाटने के लिए किया जाना चाहिए।
तकनीकी दृष्टिकोण साझा करते हुए, VIT चेन्नई के सेंटर फॉर न्यूरोइनफॉर्मेटिक्स की डॉ. श्रीदेवी एस. ने बताया कि AI पहले से ही एक सहायक उपकरण के रूप में काम कर रहा है। हालांकि, उन्होंने संवेदनशील स्वास्थ्य जानकारी की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई और वैज्ञानिकों एवं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि 'प्रिसिजन मेडिसिन' की ओर वैश्विक झुकाव कुछ चुनिंदा तकनीकी प्रदाताओं पर खतरनाक निर्भरता पैदा कर रहा है। जैसा कि लाइफसेल इंटरनेशनल के मयूर अभया ने उल्लेख किया, सीक्वेंसिंग मार्केट में एक ही कंपनी का दबदबा राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। भारत के लिए घरेलू जीनोमिक क्षमता को मजबूत करना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है।
"स्वास्थ्य सेवा में नवाचार समावेशी होना चाहिए; यदि यह डिजिटल पहुंच से वंचित लोगों तक नहीं पहुंचता, तो यह अर्थहीन है।"
पैनल ने दुर्लभ बीमारियों के उपचार में जीनोमिक डेटा की क्षमता पर भी चर्चा की। सीक्वेंसिंग तक व्यापक पहुंच प्रदान करके, डॉक्टर 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' दृष्टिकोण को छोड़कर व्यक्ति के आनुवंशिक मेकअप के आधार पर व्यक्तिगत उपचार योजनाएं बना सकते हैं।
सत्र का समापन फाउंडेशन मॉडल और स्वास्थ्य डेटा के भविष्य पर एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ। निष्कर्ष स्पष्ट था: तकनीक एक उत्प्रेरक (Catalyst) है, लेकिन चिकित्सक ही वास्तविक मार्गदर्शक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या भविष्य में AI डॉक्टरों की जगह ले सकता है?
नहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि AI एक सहायक उपकरण है जो निदान को बेहतर बनाता है, लेकिन यह मानवीय देखभाल और विश्वास की जगह नहीं ले सकता।
प्रश्न 2: भारत के लिए घरेलू जीनोमिक क्षमता क्यों महत्वपूर्ण है?
ताकि किसी एक कंपनी के एकाधिकार पर निर्भरता कम हो और भारतीय आबादी के लिए जीनोमिक सीक्वेंसिंग सस्ती और सुलभ हो सके।