IIT रुड़की और INST मोहाली के वैज्ञानिकों ने '3D-MIDAS' नामक एक क्रांतिकारी बैटरी-रहित स्मार्ट पट्टी विकसित की है। यह डिवाइस शरीर की स्वाभाविक हलचल से बिजली पैदा कर घावों को तेजी से भरने में मदद करती है।
- बिना किसी बैटरी या बाहरी पावर सोर्स के काम करने वाली '3D-MIDAS' स्मार्ट पट्टी का आविष्कार।
- शरीर की हलचल (Mechanical Energy) को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलकर घाव भरने की प्रक्रिया को 3 गुना तेज करती है।
- यह पट्टी अपनी मूल लंबाई से 8 गुना तक खिंच सकती है और 500 चक्रों के बाद भी प्रभावी रहती है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की और इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST), मोहाली के शोधकर्ताओं ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने एक ऐसी 'स्मार्ट पट्टी' तैयार की है जो न केवल घाव को ढकती है, बल्कि सक्रिय रूप से उसे ठीक करने में मदद करती है। इस तकनीक का सबसे अनूठा पहलू यह है कि यह पूरी तरह से बैटरी-रहित है और ऊर्जा के लिए मानव शरीर की गति पर निर्भर करती है।
तकनीक कैसे काम करती है?
जब किसी व्यक्ति को चोट लगती है, तो त्वचा की कोशिकाओं को ठीक करने वाले प्राकृतिक विद्युत संकेत बाधित हो जाते हैं। '3D-MIDAS' पट्टी इसी कमी को पूरा करती है। इसमें उपयोग किए गए विशेष आयन-परिवहन पदार्थों और पतले रेशों के कारण, जब मरीज चलता है या हिलता-डुलता है, तो पट्टी में खिंचाव पैदा होता है। यह यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) स्वतः ही इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल जाती है, जो कोशिकाओं के पुनर्जनन (Regeneration) को उत्तेजित करती है।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह आविष्कार स्वास्थ्य सेवा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। वर्तमान में उपलब्ध इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन डिवाइस महंगे होते हैं और उन्हें भारी बैटरी या तारों की आवश्यकता होती है। IIT रुड़की की यह तकनीक इसे पोर्टेबल और किफायती बनाती है। विशेष रूप से युद्ध क्षेत्रों, आपदा प्रबंधन और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में, जहाँ बिजली की उपलब्धता सीमित है, यह पट्टी जीवनरक्षक साबित हो सकती है।
यह तकनीक पारंपरिक चिकित्सा और नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स का एक दुर्लभ संगम है, जो भविष्य में क्रोनिक घावों के उपचार को पूरी तरह बदल सकती है।
परीक्षण और परिणाम
इस स्मार्ट पट्टी का कड़ा परीक्षण लैब और जानवरों (चूहों) पर किया गया है। परिणामों ने वैज्ञानिकों को आश्चर्यचकित कर दिया है। पेट्री डिश परीक्षणों में कोशिकाओं के विकास की गति सामान्य से 3 गुना अधिक और उनकी गतिशीलता 2.5 गुना अधिक पाई गई। चूहों पर किए गए प्रयोगों में, यह देखा गया कि 13 से 15 दिनों के भीतर घाव 90 से 95 प्रतिशत तक भर गए, जिसमें नई रक्त वाहिकाओं और कोलेजन का विकास स्पष्ट रूप से देखा गया।
| विशेषता | पारंपरिक पट्टी | 3D-MIDAS स्मार्ट पट्टी |
|---|---|---|
| पावर सोर्स | कोई नहीं / बाहरी बैटरी | बैटरी-रहित (स्व-उत्पन्न) |
| ठीक होने की गति | सामान्य | 3 गुना तेज |
| लचीलापन | सीमित | 8 गुना स्ट्रेचेबल |
| डिजाइन | ठोस/कपड़ा | जालीदार (हवादार) |
यह डिवाइस न केवल प्रभावी है बल्कि टिकाऊ भी है। 3 महीने के परीक्षण और 500 बार खिंचाव के बावजूद इसकी कार्यक्षमता में कोई कमी नहीं आई। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल 'नैनो एनर्जी' में प्रकाशित हुआ है, जिसे भारत सरकार की ANRF, ICMR, DST और PMRF जैसी एजेंसियों का समर्थन प्राप्त है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह पट्टी अभी अस्पतालों में उपलब्ध है?
उत्तर: नहीं, वर्तमान में यह लैब और पशु परीक्षणों में सफल रही है। इंसानों के लिए इसे उपलब्ध कराने से पहले क्लिनिकल ट्रायल किए जाएंगे।
प्रश्न 2: क्या इसे चार्ज करने की आवश्यकता होती है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं, यह पट्टी शरीर की स्वाभाविक हलचल और खिंचाव से ही बिजली पैदा करती है।