नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टलेशन (RSSC) के विस्तार और अंतरिक्ष मलबे को कम करने पर महत्वपूर्ण प्रगति की घोषणा की है। इसके साथ ही, BRICS स्पेस काउंसिल के लिए दिशा-निर्देश भी तैयार किए गए हैं।

  • BRICS सदस्य देशों ने रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टलेशन (RSSC) समझौते में संशोधन और नए अंतरिक्ष एजेंसियों के शामिल होने पर सहमति जताई।
  • BRICS स्पेस काउंसिल के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' का मसौदा तैयार किया गया है।
  • अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन और दीर्घकालिक स्थिरता पर विशेष जोर दिया गया।
  • क्वांटम तकनीक और विज्ञान अनुसंधान रिपॉजिटरी पर सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को अपनाया गया, जो वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। इस घोषणापत्र में रिमोट-सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टलेशन (RSSC) समझौते में संशोधन की महत्वपूर्ण प्रगति को स्वीकार किया गया है। इस संशोधन का उद्देश्य नए सदस्य देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों को इस नेटवर्क में शामिल करना है।

RSSC एक वर्चुअल नेटवर्क है जो सदस्य देशों के मौजूदा अवलोकन उपग्रहों को जोड़ता है। इसमें भारत के Resourcesat 2 और 2A, चीन के Gaofen-6 और Ziyuan III 02, और रूस के Kanopus-V प्रकार के उपग्रह शामिल हैं। यह नेटवर्क आपदा प्रबंधन, कृषि निगरानी और संसाधन मानचित्रण में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि BRICS द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में एकजुट होना पश्चिमी प्रभुत्व वाले अंतरिक्ष ढांचे को एक सशक्त विकल्प प्रदान करता है। यह न केवल तकनीकी डेटा साझाकरण को बढ़ावा देता है, बल्कि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका भी देता है।

अंतरिक्ष सहयोग अब केवल वैज्ञानिक खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक संप्रभुता का एक नया मोर्चा बन गया है।

शिखर सम्मेलन के दौरान BRICS स्पेस काउंसिल के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (कार्यक्षेत्र) का मसौदा भी तैयार किया गया। इसके अतिरिक्त, सदस्य देशों ने अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) के शमन और बाहरी अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के महत्व पर चर्चा की। बेंगलुरु में आयोजित अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

घोषणापत्र में 'बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ को रोकने' (PAROS) के लिए गैर-बाध्यकारी समझौतों और पारदर्शिता उपायों पर भी जोर दिया गया। सदस्य देशों ने एक एकल ओपन-एंडेड वर्किंग ग्रुप बनाने की पहल का स्वागत किया, जो PAROS पर कानूनी रूप से बाध्यकारी उपकरण बनाने की दिशा में काम करेगा।

भविष्य की योजना के तहत, एक BRICS विज्ञान और अनुसंधान रिपॉजिटरी बनाने का प्रस्ताव है। यह एक ऐसा मंच होगा जहाँ सदस्य देश डेटा सुरक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकारों का सम्मान करते हुए ज्ञान साझा कर सकेंगे। इसके अलावा, क्वांटम तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की भी पुष्टि की गई है।

Did You Know?: यूरी गागरिन ने 12 अप्रैल, 1961 को अंतरिक्ष में कदम रखकर मानव इतिहास में एक नया अध्याय लिखा था, जिसकी 65वीं वर्षगांठ का भी इस शिखर सम्मेलन में उल्लेख किया गया।

Frequently Asked Questions

1. RSSC क्या है?
RSSC (BRICS Remote Sensing Satellite Constellation) एक वर्चुअल नेटवर्क है जो BRICS देशों के रिमोट-सेंसिंग उपग्रहों को एकीकृत करता है ताकि पृथ्वी के अवलोकन के लिए बेहतर डेटा प्राप्त किया जा सके।

2. BRICS स्पेस काउंसिल का क्या उद्देश्य है?
इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अंतरिक्ष अनुसंधान, तकनीक साझा करने और अंतरिक्ष गतिविधियों के समन्वय के लिए एक औपचारिक ढांचा प्रदान करना है।