कोच्चि से तिरुवनंतपुरम तक, केरल के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) मालिक अनिश्चित बिजली कटौती के कारण गंभीर चिंता में हैं। चार्जिंग में व्यवधान न केवल दैनिक यात्राओं को प्रभावित कर रहा है, बल्कि बैटरी की उम्र पर भी खतरा मंडरा रहा है।
- केरल में बार-बार होने वाली बिजली कटौती से EV चार्जिंग शेड्यूल पूरी तरह बाधित हो गया है।
- KSEB ने उपयोगकर्ताओं को ऑफ-पीक घंटों में चार्जिंग करने की सलाह दी है।
- विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बार-बार चार्जिंग रुकने से बैटरी की लाइफ (Battery Health) कम हो सकती है।
- राज्य सरकार अगले वित्तीय वर्ष में 200 नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रही है।
केरल के विभिन्न शहरों, विशेष रूप से कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) मालिकों के बीच एक नया संकट उभर रहा है। राज्य में हो रही अनिश्चित और बार-बार बिजली कटौती ने वाहन मालिकों की नींद उड़ा दी है। कई उपयोगकर्ताओं का कहना है कि बिजली जाने के कारण उनकी गाड़ियाँ पूरी तरह चार्ज नहीं हो पातीं, जिससे सुबह काम पर निकलने के समय वे अधूरी बैटरी के साथ फंसे रहते हैं।
वेन्नाला के निवासी डॉ. हरिंद्रन के अनुसार, बिजली कटौती का कोई निश्चित समय नहीं है, जिससे चार्जिंग की योजना बनाना असंभव हो गया है। उन्होंने बताया कि रात में प्लग-इन करने के बावजूद, बिजली जाने पर चार्जिंग रुक जाती है और बिजली वापस आने पर चार्जर को मैन्युअल रूप से फिर से कनेक्ट करना पड़ता है। यदि कोई सो रहा हो, तो उसे पता ही नहीं चलता कि चार्जिंग रुक गई है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केरल के हरित परिवहन (Green Mobility) लक्ष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि बुनियादी ढांचा (Infrastructure) बिजली की आपूर्ति को स्थिर नहीं रख पाता है, तो उपभोक्ता ईवी अपनाने से कतरा सकते हैं। यह स्थिति ग्रिड स्थिरता और ईवी मांग के बीच के असंतुलन को दर्शाती है।
बार-बार चार्जिंग चक्र का बाधित होना बैटरी की रासायनिक संरचना को प्रभावित कर सकता है, जिससे समय से पहले बैटरी क्षरण (Degradation) होने का जोखिम बढ़ जाता है।
केरल राज्य बिजली बोर्ड (KSEB) ने 2024 से ही ईवी मालिकों से आग्रह किया था कि वे शाम के पीक आवर्स के बजाय ऑफ-पीक घंटों में चार्जिंग करें। हालांकि, व्यावसायिक उपयोग करने वाले मालिकों, जैसे कि डिलीवरी सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए यह संभव नहीं है, क्योंकि उनकी गाड़ियाँ सुबह पूरी तरह चार्ज होनी चाहिए।
KSEB के अधिकारियों का मानना है कि जनता में जागरूकता की कमी है। उनका कहना है कि यदि लोग सुबह के समय चार्जिंग करें, तो ग्रिड पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, राज्य सरकार की 200 नए चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना भविष्य में राहत दे सकती है, लेकिन यह KSEB के लिए बिजली की मांग को और बढ़ाने वाली चुनौती भी साबित होगी।
| उपयोगकर्ता श्रेणी | मुख्य समस्या | KSEB का सुझाव |
|---|---|---|
| घरेलू उपयोगकर्ता | अनिश्चित समय पर कटौती | ऑफ-पीक चार्जिंग |
| व्यावसायिक उपयोगकर्ता | सुबह की डिलीवरी में बाधा | सुबह चार्जिंग अपनाएं |
Frequently Asked Questions
1. क्या बिजली कटौती से EV बैटरी खराब हो सकती है?
हाँ, बार-बार चार्जिंग के बीच में व्यवधान आने से बैटरी हेल्थ पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
2. KSEB ने चार्जिंग के लिए क्या सलाह दी है?
KSEB ने बिजली के लोड को कम करने के लिए ऑफ-पीक घंटों और सुबह के समय चार्जिंग करने की सलाह दी है।